अब गांवों से मच्छर भगाएंगे प्रधान जी
- ग्राम प्रधान कराएंगे छिड़काव, स्वास्थ्य विभाग सिर्फ मुहैया कराएगा दवा
- शासन ने दिए निर्देश, मच्छरों से निजात पाने की जंग होगी शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। मच्छरों से परेशान ग्रामीणों को बचाने के लिए सरकार ने अब ग्राम पंचायतों को ही जिम्मेदारी थमा दी है। गांवों में मच्छर रोधी दवा का छिड़काव कराने की जवाबदेही अब स्वास्थ्य विभाग के बजाए ग्राम प्रधान की होगी। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ दवा मुहैया कराएगा।
गांव के निजाम को शासन ने बता दिया है कि हर छोटी-छोटी बात के लिए अधिकारियों से गुहार लगाने की बजाए खुद जिम्मेदारी से फैसला लेना सीखें। दरअसल, पंचायती राज की अवधारणा को साकार करने के लिए ग्राम पंचायतों को भारी-भरकम बजट देने के साथ ही स्थानीय सरकार के लिहाज से काम करने की छूट व निर्णय लेने की भी छूट दी गई। इसके बावजूद ग्राम पंचायतों में बदलाव की बयार थमी हुई है। हर छोटी बड़ी समस्या के लिए ग्राम प्रधान अधिकारियों से दरख्वास्त लगाते घूमते हैं, जबकि वह चाहें तो स्वयं यह काम कर सकते हैं। इसमें कुछ वजह से जानकारी का अभाव व अधिकारियों का असहयोग भी है।
मच्छर रोधी दवा का गांवों में छिड़काव न होना भी यही कारण है। हर ग्राम पंचायत को 10 हजार रुपये का अनटाइड फंड दिया जाता है। इसे मुख्य रूप से सफाई व स्वच्छता में ही खर्च करना होता है। ग्राम प्रधान व एएनएम का संयुक्त खाता होता है, लेकिन शायद ही कोई ऐसा गांव होगा, जहां यह फंड खर्च होता हो।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एके सिंह ने बताया कि मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, इसलिए अब नियमित रूप से मच्छर रोधी का छिड़काव जरूरी हो गया है। शासन ने मच्छररोधी दवा के छिड़काव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ दवा उपलब्ध कराएगा।