मुकद्दस रमजान में रहमत वाला पहला अशरा हुआ पूरा
गढ़मुक्तेश्वर। मुकद्दम रमजान माह के तीन अशरों में अल्लाह की खास रहमत नाजिल होने वाला पहला अशरा मुकम्मल होने पर मगफिरत अर्थात मुक्ति वाला दूसरा अशरा आज प्रारंभ होगा। जिसमें कुरान पाक की तिलावत, अल्लाह का जिक्र और गरीब मजलूमों की मदद की खास अहमियत मानी जाती है।
मुकद्दस रमजान के महीने में दस दस दिनों वाले तीन अशरे(भाग) होते हैं। जिनमें पहला अशरा अल्लाह की रहमत, दूसरा जाने अनजाने में किए होने वाले गुनाहों से मगफिरत (मुक्ति) और तीसरा दोजख (नर्क) की आग से बचाव करने वाला माना जाता है। इस लिहाज से अल्लाह की खास रहमत वाला पहला असरा बृहस्पतिवार की देर शाम को रोजा इफ्तार के बाद संपन्न हो गया, जिसके बाद शुक्रवार की तड़के में दूसरे अशरे की पहली सहरी होगी। दरगाह शरीफ मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद अनस का कहना है कि अल्लाह ने फरमाया है कि जिस बालिग मर्द या औरत की जिंदगी में मुकद्दस रमजान का महीना आए और वह इसमें अपनी बख्शिश न करा पाए तो फिर उसके लिए इससे बड़ी दूसरी कोई बदनसीबी नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि रमजान माह में हर अच्छे बुरे अमल का बदला बढ़कर 70 गुना हो जाता है, इसलिए इबादत करने के साथ ही गरीब मजलूमों की हर मुमकिन मदद करें और बुराइयों से पूरी तरह दूर रहें। शहर काजी हाजी सैयद कसीमुद्दीन हम्माद और जामा मस्जिद चौपला के इमाम हाफिज मुहम्मद अली ने बताया कि पहला अशरा पूरा होने पर रमजान माह का दूसरा अशरा आज प्रारंभ होगा, जिसमें रोजदारों को जाने अनजाने में होने वाले गुनाहों से मगफिरत अर्थात मुक्ति हासिल होती है।