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दिवाली के बाद खतरनाक होंगे शहर के हालात

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दिवाली बाद खतरनाक होंगे शहर के हालात
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हापुड़। पिछले कई माह से खराब हुई आबोहवा ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को खतरनाक गैसों का चैंबर बना दिया है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित जनपदों में हापुड़ भी शामिल है। पिछले कई दिनों से शहर के हालात बदतर हैं। हालांकि शनिवार को मौसम में कुछ बदलाव जरूर दिखायी दिया। लेकिन दिवाली के बाद हालात खतरनाक होंगे।
लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ने से सुबह की सैर तक पर प्रदूषण का गहर असर पड़ा है। शहर की सड़कों से लेकर पॉश कालोनियों की हवा पूरी तरह से बिगड़ी हुई है। सुबह के समय घरों से निकलने वाले लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। प्रदूषण में व्याप्त धुंध के कारण लोग बाहर की हवा से दूर रहने में ही भलाई समझ रहे हैं।
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अभी कम है असर-
प्रदूषण को रोकने के लिए ईपीसीए (इनवायर्नमेंट पॉल्यूशन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल अथॉरिटी) द्वारा लागू की गई पाबंदी को तीन दिन बीत चुके हैं। हालांकि अभी पाबंदी पूरी तरह से लागू नहीं हो सकी है। लेकिन एयर क्वालिटी इंडेक्स में कुछ सुधार जरूर हुआ। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इससे सुधार होगा। लेकिन दिवाली से पहले वातावरण में छायी धुंध को देखते हुए इस बार दीपावली के बाद शहर के हालात काफी गंभीर होने वाले होंगे। आतिशबाजी के कारण प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जायेगा। ऐसे में हालात सुधरने में कई दिन तक लग सकते हैं।

खतरनाक स्थिति में है हापुड़ का प्रदूषण --
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा एनसीआर के प्रदूषण का स्तर मापकर श्रेणी निर्धारित की है। इसमें प्रदूषण का स्तर 2.5 पीएम पर 250 से 300 माइक्रोग्राम होने पर वेरी पुअर श्रेणी में आ जाता है। हापुड़ भी इस श्रेणी में शामिल है। इससे पहले हापुड़ का प्रदूषण इस स्तर से भी ऊपर पहुंच गया था। शनिवार को हापुड़ में पीएम 2.5 -256 दर्ज किया गया। जबकि पीएम 10- 349 दर्ज किया गया। इसके अलावा एक्यूवाई - 346 दर्ज किया गया।

अंतराष्ट्रीय मानक और प्रभाव
पीएम 2.5 एयर क्वालिटी इंडेक्ट
0-60 : उत्तम हवा, सुरक्षित
69-99 : सामान्य
100-149: हल्का प्रदूषण, सांस के मरीजों के लिए सतर्कता जरूरी
150-200 : बेहद प्रदूषित हवा सभी के लिए नुकसानदेह
201- 299 : हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर
300 से ज्यादा : अधिक हानिकारक, हृदय, लंग्स और ब्रेन के लिए खतरनाक

बोले चिकित्सक ..
हृदय रोग विशेषज्ञ डा. जीवोत्तम नारंग ने बताया कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौत में से 60 फीसदी दिल की बीमारी से होती है। पीएम 2.5 आकार के सूक्ष्म कण फेफड़ों के रास्ते कई बार दिल की धमनियों तक पहुंचकर अटैक का कारण बनते हैं। प्रदूषण से रक्तचाप भी बढ़ता है।

हड्डी रोड विशेषज्ञ डा. नरेंद्र मोहन सिंह ने बताया कि एनसीआर में गहरी धुंध से धूप से मिलने वाली विटामिन-डी नहीं मिल पा रही है। जिस कारण हड्डियों में कैल्शियम का अवशोषण नहीं हो पाता है। 70 फीसदी लोगों की हड्िडयां कमजोर मिलती है। प्रदूषित हवा के साथ रासायनिक कण रक्त में पहुंचकर बोनमेरो को भी बीमार कर सकते हैं। ऐसे में व्यक्ति में खून संबंधित विकार भी बढ़ा रहे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण विभाग के स्टेशन इंचार्ज सलमान राणा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर प्रदूषण का बढ़ते स्तर को देखते हुए निर्माण कार्य और उद्योग संचालन पर पाबंदी लगाई गई है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोकने के लिए धूल वाले स्थानों पर छिड़काव करा।
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