सूरज से भी बड़े हैं मेरी मां के हाथ...
हापुड़। काव्यदीप साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में मातृ दिवस के अवसर पर काव्य संध्या का आयोजन किया गया। काव्य संध्या में कवियों ने कविता पढ़कर सभी का मन मोह लिया।
काव्य संध्या का शुभारंभ कमलेश त्रिवेदी फर्रुखाबादी ने मां सरस्वती की वंदना कर किया। डा. अशोक मैत्रेय ने पढ़ा सूरज से भी बड़े हैं मेरी मां के हाथ, थाली से चंदा बंधा इसी सोच के साथ। विजय वत्स ने पढ़ा जन्म लिया जब मैंने तो अम्मा तेरी गोद मिली, तेरे दूध की बूंद बूंद से मेरी जीवन बेल खिली। आशुतोष आजाद ने पढ़ा माता ही गुरु है और माता ही है ज्ञान, माता से ही दुनिया में मेरी पहचान। मोहनलाल तेजियान ने पढ़ा बांधे रहती जगत को मां निज बाहुपाश, मां के ही अस्तित्व से ये धरती आकाश। राम आसरे गोयल ने पढ़ा मां चंदा सी शीतल है, मां वृक्ष की छाया है, मां सुख दुख की साथी है, मां ही तो हमसाया है। पूजा महेश ने पढ़ा मां के प्यार में बेटी ऐसी खो जाती, कभी कभी वह मां की भी मां हो जाती।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए उमेश शर्मा ने पढ़ा भरी दुपहरी जेठ की सुलग रहा है गांव, ममता मीठा जल लगे मां का आंचल छांव। फसीह चौधरी ने पढ़ा लफ्ज मां को दोस्तों करता हूं मैं झुक कर सलाम, मां मेरी हो या तुम्हारी उसका है आला मुकाम।
मौके पर रामवीर आकाश, मुशर्रफ चौधरी, मनीष गुप्ता, नगेंद्र शिशौदिया, राकेश कुमार, महावीर वर्मा, शिव प्रकाश शर्मा, गंगाशरण शर्मा ने भी अपने पाठ पढ़ लोगों को भाव विभोर कर दिया।