नई बिलिंग कंपनी के सॉफ्टवेयर में फंसे 90 हजार उपभोक्ताओं के बिल
हापुड़। बिजली के के बिल जारी करने को नामित की गई नई बिलिंग कंपनी के सॉफ्टवेयर में 90 हजार उपभोक्ताओं के बिल फंस गए हैं। मीटर रीडर गलत बिल जारी कर उपभोक्ताओं को झटका दे रहे हैं। सही मीटर का बिल भी आरडीएफ का बना रहे है। इन खामियों को दुरस्त करने में लिपिकों के भी पसीने छूट रहे हैं। मामले की गंभीरता पर निगम के अधिकारियों ने बिलिंग कंपनी को नोटिस जारी कर, समस्या को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
हापुड़ डिवीजन के उपभोक्ताओं को बिल जारी करने का जिम्मा पहले सांई कंपनी को था। दो महीने पूर्व इस कंपनी से यह टेंडर हटाकर एक अन्य बिलिंग कंपनी को दे दिया गया है। जब से नई बिलिंग कंपनी को यहां बिल जारी करने का अधिकार मिला है। डिवीजन के 90 हजार उपभोक्ता परेशान हैं। इनमें से अधिकांश निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
क्योंकि मीटर रीडर अच्छे खासे मीटरों के बिल भी यूनिट के न बनाकर आरडीएफ के बना रहे हैं। इन बिलों को संशोधित कराना उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। हालांकि निगम के अधिकारी इस असुविधा का कारण सॉफ्टवेयर में बदलाव को बता रहे हैं। बिलों की खामियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डिवीजन कार्यालय की बिल संशोधन इकाई में पहले के मुकाबले 20 गुना अधिक बिल ठीक होने के लिए पहुंच रहे हैं।
मोबाइल फोन से स्केन कर जारी हो रहे बिल
- नई बिलिंग कंपनी ने बिल जारी करने की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। सभी मीटर रीडर को एंड्रोयड मोबाइल फोन दिए गए हैं। जिसमें मीटर का फोटो व यूनिट अपलोड की जाती है, इसके बाद मशीन से स्केन होकर बिल स्वत: ही निकल जाता है। लेकिन इसमें खामियों की भरमार से उपभोक्ता परेशान हैं।
सॉफ्टवेयर में बदलाव बना त्रुटियों का कारण
- बिलिंग कंपनी में बदलाव के चलते सॉफ्टवेयर भी बदला गया है। जिसके चलते उपभोक्ताओं का पुराना डाटा कंपनी को पूरा नहीं मिला है। जो बिलों में त्रुटियों की भरमार का मुख्य कारण है।
कोट
अधिशासी अभियंता सुनील कुमार का कहना है कि कंपनी के बदलाव के साथ ही सॉफ्टवेयर भी बदला गया है। सॉफ्टवेयर के कारण ही यह त्रुटियां सामने आ रही हैं। जल्द ही उपभोक्ताओं को इस समस्या से राहत दिला दी जाएगी।