भारतीय रेलवे प्रशासन कितनी गति से काम करता है, इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि एफसीआई हापुड़ के डिपो परिसर में फिर से रेल की पटरियां बिछाने के लिए रेलवे ने चार साल पहले 5 करोड़ रुपये वसूले थे, लेकिन आज तक वहां पटरियां नहीं बिछीं।
ऐसे में रेलवे स्टेशन के माल गोदाम से अनाज की ढुलाई पर निगम को लाखों रुपये अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है। दरअसल वर्ष 1960 में हापुड़ में एफसीआई के डिपो और क्षेत्र कार्यालय की स्थापना के समय ही डिपो
परिसर में माल गाड़ियों के आवागमन के लिए 6 रेल पटरियां भी विभिन्न गोदामों और साइलो के साथ-साथ बिछाई गई थीं। तभी से दूसरे प्रदेशों से खाद्यान्न लेकर मालगाड़ियां यहां आती रही हैं।
करीब छह साल पहले रेलवे ने एफसीआई परिसर की रेलवे लाइनों को मालगाड़ियों के आवागमन के लिए रिजेक्ट कर दिया और कहा कि यहां फिर से नई रेलवे लाइन बिछाई जाएं। इसके लिए रेलवे ने एफसीआई से पैसा देने को कहा जबकि एफसीआई का दावा था कि यह कार्य रेलवे का है।
इसी चक्कर में दो साल खिंच गए और अनाज रेलवे स्टेशन से ट्रकों से ढुलने लगा। बाद में करीब चार साल पहले एफसीआई ने पांच करोड़ रुपये रेलवे अफसरों की डिमांड के अनुसार दे दिए। बावजूद इसके आज तक रेलवे ने यहां नई पटरियां नहीं बिछाईं।
इस मामले को लेकर 29 जुलाई 2016 को रेलवे और एफसीआई के अधिकारियों के बीच मुरादाबाद में एक बैठक भी हुई थी, जिसमें रेलवे के अफसरों ने कहा कि सिर्फ दो माह के भीतर काम शुरू कराकर पटरियां बिछा दी जाएंगी।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बड़ौदा हाउस दिल्ली से तकनीकी स्वीकृति आनी बाकी है। उस समय एफसीआई के क्षेत्र प्रबंधक (डीएम) का कार्यभार मायापति शर्मा पर था।
इस समय एफसीआई के क्षेत्र प्रबंधक (डीएम) योगराज हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार रेलवे अफसरों के संपर्क में है लेकिन बार-बार यही जवाब मिलता है कि तकनीकी स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी कर कार्य शुरू करा देंगे।
उन्होंने बताया कि रेलवे अधिकारी सिर्फ दो लाइनों की मरम्मत कर उन्हें चालू कराने का दबाव बना रहे थे, जिसे इंकार कर दिया गया है। योगराज शर्मा ने कहा कि रेलवे ने जिन पटरियों को रिजेक्ट कर दिया है,
अब उन पर मालगाड़ी कैसे आ सकती है। वैसे भी जब एफसीआई पूरा पैसा जमा कर चुकी है, तो अब हर हाल में कार्य पूरा ही कराया जाएगा। उन्होंने दो दिन पहले रेलवे मुरादाबाद मंडल के डीईएन अमित कुमार को इस कार्य को जल्द पूरा कराने के लिये कड़ा पत्र भेजा है।
इतना ही नहीं इस संबंध में रेल मंत्रालय के आला अफसरों को भी एफसीआई की ओर से पत्र भेजे जा रहे हैं। कुल मिलाकर अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वैसे भी दोनों विभाग केंद्र सरकार के अधीन हैं।