संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। जिले की 44 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। 12 महीनों में 55 हजार गर्भवती महिलाओं के हिमोग्लोबिन की जांच की गई। जिसमें 24200 महिलाओं में सामान्य से कम खून पाया गया है। इसमें करीब सात हजार महिलाओं में हिमोग्लोबिन का स्तर आठ डेसीलीटर से भी कम पाया गया है।
सुरक्षित प्रसव व शिशु मृत्युदर कम करने के लिए शासन तमाम योजनाएं संचालित कर रहा है। गर्भवती महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण कर स्वास्थ्य की जांच की जाती है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है और बचाव की जानकारी भी दी जाती है। लेकिन तमाम योजनाओं के बाद भी जिले में गर्भवती महिलाएं स्वस्थ नहीं हैं। वह खून की कमी से जूझ रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार एक साल में जिले की 55000 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसमें 24200 महिलाओं में खून की कमी पाई गई। इनमें से 7058 महिलाएं ऐसी हैं, जिनके शरीर में खून आठ प्वाइंट से भी कम है। चिकित्सकों ने प्रसव से पहले उन्हें ब्लड चढ़ाने की सलाह दी है। कई गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क की श्रेणी में चिह्नित की गई हैं।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ.प्रदीप मित्तल ने बताया कि सामान्य महिला के शरीर में 11.5 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है। खून की लगातार कमी के कारण अब 10 ग्राम डेसीलीटर तक रक्त की मात्रा को सामान्य मान लिया जा रहा है। इससे कम खतरनाक है। कई ऐसी महिलाएं आती हैं, जिनमें रक्त की मात्रा 10 ग्राम डेसीलीटर से भी कम रहती है।
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