भगवत भजन करने से व्यक्ति आत्मविश्वासी होता है : मनीष आचार्य
पिलखुवा। भगवान की प्राप्ति को यज्ञ, हवन, योग व तप आदि का सहारा लिया जाता था, लेकिन कलयुग में मात्र भक्ति से ही भगवान की प्राप्ति हो सकती है।
मानव को भगवान के चरणों में प्रेम व श्रद्धा भक्ति का भाव रखना चाहिए। यह मानव का सबसे बड़ा धर्म है। यह विचार गांव डूहरी स्थित फाइव एलिमेंट्स फार्म हाउस में चल रही श्रीमद्भागवत के चौथे दिन कथा वाचक मनीष आचार्य ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि पापों का नाश करने के लिए भगवान धरती पर अवतार लेते हैं। कथा केवल सुनने के लिए नहीं है बल्कि इसे अपने जीवन में उतारें इसका पालन करें। भगवत भजन करने से व्यक्ति स्वयं तो आत्मविश्वासी होता ही है, दूसरों में भी विश्वास जगाता है। आत्मविश्वास में कमी आने पर हम हर प्रकार से संपन्न होते हुए भी हमें कार्य की सफलता पर संशय रहता है। समापन के अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि प्रतिदिन माता-पिता का आदर करें, सूर्य को अर्ध्य अर्पण करें, भगवान को भोग लगाएं, गाय को रोटी दें और अपने आत्मविश्वास को हमेशा कायम रखें। कथा सुनने वालों में विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष दीपक तोमर, सुभाष तोमर, प्रो. बिशन सिंह तोमर, शिवराज सिंह, कृष्ण पाल सिंह, ब्रिजेश तोमर, कुंवरपाल, अमित, शिखर, अक्षय कुमार आदि शामिल रहे।