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श्रीचण्डी मंदिर के मामले में अब फिर डीआर के आदेशों को लेकर खींचतान

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श्री चण्डी मंदिर मामले में डीआर के आदेश से फिर बढ़ी रार
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हापुड़। श्री चण्डी मंदिर के मामले में एक बार फिर डीआर के आदेशों को लेकर खींचतान शुरू हो गयी है। मंदिर की गुल्लक और काबिज प्रबंध समिति के पदाधिकारियों पर लगे गबन के आरोप को डिप्टी रजिस्ट्रार ने सही मानते हुए सख्त कार्यवाही की संस्तुति एसडीएम से की है। उधर कार्यवाहक जिलाधिकारी ने भी इस मामले में सीओ को रिपोर्ट दर्ज कराने और एसडीएम को मंदिर के प्रबंधन कार्य से रोकने के आदेश दिये हैं। वहीं काबिज प्रबंध समिति ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए अपनी सफाई भी दी है।
डीआर की ओर से अधिकृत श्री चण्डी मंदिर की प्रबंधक समिति के मंत्री भगीरथ मल चौधरी और पूर्व प्रधान नरेन्द्र अग्रवाल कबाड़ी ने मंगलवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि डिप्टी रजिस्ट्रार सोसायटीज मेरठ सुभाष सिंह को उन्होंने एक पत्र भेजकर अवगत कराया था कि श्री चण्डी मंदिर की गुल्लक 7 मई और 9 अक्तूबर को अवैध रूप से खोली गयी हैं जिनमें से 8 लाख रुपये का गबन कर लिया गया है।
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उनका कहना है कि तभी 25 अक्तूबर को डिप्टी रजिस्ट्रार ने एसडीएम हापुड़ को पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने तथा एसडीएम से उक्त तीनों पदाधिकारियों से समस्त कार्यभार लेकर नई प्रबंध समिति को दिलाने के लिए कहा।
उधर कार्यवाहक जिलधिकारी ने भी 27 अक्तूबर को सीओ और एसडीएम को आदेशित किया है श्री चण्डी मंदिर की वर्तमान प्रबंध समिति को बेदखल कर उसके तीन पदाधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायें तथा एक सप्ताह में रिपोर्ट दें।
उधर काबिज वर्तमान प्रबंध समिति के प्रधान चेतन प्रकाश का दावा है कि उन पर लगे सभी आरोप निराधार है। पहले लगे आरोपों में क्लीन चिट मिलने पर तत्कालीन डीएम ने उन्हें गुल्लक खोलने का अधिकार दिया था। उनका दावा है कि अब भी गुल्लक खोलने पर जो पैसा निकला, उसका भी वह हिसाब कमेटी के सामने रख चुके हैं।
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जबकि पूर्व प्रधान नरेन्द्र अग्रवाल कबाड़ी का दावा है कि सोसायटी एक्ट में किसी संस्था के बारे में निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ डीआर को है जो वर्तमान में कब्जा जमाये बैठी कमेटी को मंदिर समिति के पदों से पहले ही अलग कर चुके हैं। फिर गुल्लक खोलने का अधिकार कहां से आ गया।
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