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रौद्र रूप में आई गंगा, बढ़ी गांवों की ओर

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रौद्र रूप में आई गंगा, बढ़ी गांवों की ओर
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गढ़मुक्तेश्वर। उफनाई गंगा मंगलवार को गांवों की ओर निकल पड़ी। निचले इलाकों में हजारों हेक्टेयर जंगली क्षेत्र और फसलों को जलमग्न करते हुए गंगा आबादी से जुड़े रास्तों तक पहुंच गई है। नदी का वेग देख ग्रामीण दहशत में हैं। दजर्नभर से ज्यादा गांव पानी से घिर गए हैं। कई गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। तहसील प्रशासन प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को निकालने और राशन व केरोसिन जैसे जरूरी सामान मुहैया कराने में जुट गया है। हालांकि अधिकारियों ने फिलहाल बाढ़ से इंकार किया है।
प्रशासनिक स्तर से फिलहाल बाढ़ जैसी किसी भी स्थिति से इंकार किया जा रहा है, लेकिन खादर क्षेत्र की जमीनी हकीकत कमोबेश यही है। हजारों हेक्टेयर जंगल समेत कई गांवों की आबादी से जुड़े रास्तों में गंगा का पानी भर चुका है। मंगलवार की सुबह होते ही जंगल में हर तरफ पानी भरा देख खादर के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। चौतरफा पानी से घिरे नयागांव, कुदैनी मंढैया, रेतावाली मंढैया, कल्याण वाली मंढैया समेत आठ से भी अधिक गांवों के लोग अपने परिवार और पशुओं समेत सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। चेतावनी का निशान (198.73 मीटर) पार होने के बाद भी जलस्तर में बढ़ोतरी होने से गंगा का रौद्र रूप थमने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि जलस्तर में बढ़ोतरी होने से गंगा नदी 198.73 मीटर वाले यलो अलर्ट के निशान को लांघ चुकी है। मंगलवार देर शाम नदी का जलस्तर समुद्रतल से 198.90 मीटर के निशान पर पहुंच चुका है। जो खतरे के निशान (199.03) से महज 13 सेंटीमीटर दूर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसडीएम ज्योति राय और तहसीलदार मनोज कुमार सिंह ने खादर क्षेत्र का दौरा कर बाढ़ संभावित गांवों की आबादी और जंगल का निरीक्षण किया।
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कई परिवारों ने किया पलायन, दिनभर रहे भूखे प्यासे
बाढ़ की आशंका से खौफजदा ग्रामीण गांवों से पलायन करने लगे हैं। गांवों के बाहरी छोर की आबादी से लेकर जंगल और रास्तों पर जलभराव होने से लोगों में दहशत फैली हुई है। जो परिवार गांव छोड़कर दूसरे स्थानों को पलायन कर रहे हैैं, उनकी सहायता के लिए तहसील प्रशासन ने गंगानगरी, कुदैनी मंढैया और इनायतपुर समेत कई गांवों में नाव मुहैया कराई है। गंगानगर में रहने वाले लोग खतरे को भांपकर ब्रजघाट में सुरक्षित स्थानों पर पड़ाव डाल रहे हैं। पीड़ित मन्नू, रेखा, दिलीप और हरकेश मंडल ने बताया कि वह परिवारों के साथ ब्रजघाट में पड़ाव डाल चुके हैं। सुबह से लेकर शाम सात बजे तक प्रशासनिक स्तर से खाने पीने की कोई भी चीज नहीं दी गई। ऐेसे में पूरे दिन यह लोग भूखे प्यासे रहे। वहीं मेला मार्ग, मंढैया किशन सिंह और चक लठीरा को जाने वाले रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इन पर करीब एक फुट तक पानी बह रहा है। जिन गांवों में अब तक नाव नहीं लग पाई हैं, वहां रहने वालों को रास्तों में पानी भरा होने के कारण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच पाना भी मुश्किल हो गया है।

आठ गांवों की बिजली काटी
खादर के गांवों के जंगल में चौतरफा जलभराव होने से उनमें बिजली सप्लाई पहुंचाने वाले खंभों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते बिजली निगम ने आनन फानन में वहां की बिजली सप्लाई रोक दी है। बाढ़ जैसी स्थिति में घिरे आठ से भी अधिक गांवों की बिजली सप्लाई रुकने से वहां ब्लैक आउट की स्थिति है।

केरोसिन और राशन का कराया जा रहा वितरण
खादर क्षेत्र का दौरा कर एसडीएम ज्योति राय ने बाढ़ जैसी स्थिति से प्रभावित गांवों में रहने वालों की समस्याएं सुनी। उन्होंने बताया कि राहत के तौर पर गांवों में राशन सामग्री और केरोसिन का वितरण कराया जा रहा है। बाढ़ राहत चौकियों समेत बाढ़ प्रभावित गांवों को दी जा रही मदद में कोई भी लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा
बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। एसडीएम का कहना है कि जंगल समेत गांवों की आबादी से सटे रास्तों में स्वास्थ्य विभाग समेत पशु चिकित्सा विभाग की टीम भेजी जाएगी। ग्रामीणों के साथ ही बीमार मवेशियों को बेहतर इलाज के साथ ही उन्हें जीवन रक्षक दवाएं भी दी जाएंगी।

52 साल बाद रौद्र रूप में आई गंगा!
जल निगम के सूत्रों का कहना है कि अगस्त के आखिरी सप्ताह में गंगा नदी ने करीब 52 साल बाद ऐसा रौद्र रूप धारण किया है। पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश और बादल फटने के साथ ही डैम फुल के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

मवेशियों के चारे का संकट गहराया
करीब दो दर्जन गांवों के हजारों हेक्टेयर जंगल में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। गंगा का पानी ईख समेत हरे चारे की फसलों के ऊपर से होकर बह रहा है, जिससे पशुओं के चारे की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। चारा न मिलने से पशुओं की हालत दयनीय हो गई है।

बिजनौर से छोड़ा गया पानी, और बढ़ेगा जलस्तर
सिंचाई महकमे के कंट्रोल रूम के सूत्रों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही बारिश से बांधों में पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके चलते मंगलवार शाम चार बजे बिजनौर बैराज से 1.47 लाख 885 सौ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी बुधवार दोपहर तक गढ़-ब्रजघाट में पहुंचेगा। इससे नदी का जलस्तर और बढ़ना तय है।

कोट
अभी नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक नहीं पहुंचा है। फिलहाल बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। एहतियातन निचले जंगल में बसे गांवों को पूरी तरह चौकस रहने की हिदायत दी गई है। - ज्योति राय, एसडीएम

पहाड़ों की बारिश और बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने से गंगा में उफान आने पर खादर क्षेत्र के जंगल समेत कई गांवों की आबादी से सटे रास्तों पर पानी भर गया है। मंगलवार को पहाड़ों पर बारिश नहीं हुई है। ऐसे में जलस्तर कम होने की पूरी संभावना है। गंगा के तेज बहाव से भू-कटान होना एक सामान्य बात है, जिसकी जांच कराकर तिगरी धाम की तर्ज पर पक्का बांध बनवाने की डिमांड शासन को भेजी जाएगी।- मनोज कुमार सिंह, तहसीलदार

फोटो 13 से 16 तक

आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों की टूटी कमर
सूखे जैसे हालात झेलने के बाद अब मेहनतकश किसान गंगा का कहर झेल रहे हैं। खादर में फसलें डूबने और भूकटान में बेशकीमती जमीन समाने से किसानों को करोड़ों रुपये की चपत लगी है। जनपद में सबसे पिछड़ा क्षेत्र कहलाए जाने वाला गढ़ खादर कृषि प्रधान क्षेत्र है। इसमें रहने वाले 85 फीसदी परिवारों की जीविका खेती और उससे जुड़े काम-धंधों पर आधारित है।

इस बार मुसीबत पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। गंगा के उफान से जलभराव होने पर फसलें पहले ही बुरी तरह बर्बाद हो गई थीं, लेकिन अब बड़ी मात्रा में पानी भरने से शेष उम्मीद भी दम तोड़ गई है।
- हुकुम सिंह, किसान
भू-कटान होने से फसलों समेत बेशकीमती जमीन भी गंगा की जलधारा में समा रही है। इससे किसान पूरी तरह से टूट गए हैं। प्रशासनिक स्तर से किसानों को कोई मदद नहीं मिल रही है।
- बबलू, किसान
हजारों हेक्टेयर जंगल में पानी भरने से प्राकृतिक घास और हरे चारे की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। इससे पशुपालन के सहारे गुजर बसर करने वाले परिवारों को चारे का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है।
- यशपाल सिंह, पशुपालक
जंगल में पानी भरने से फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। शुरू में सूखे के हालात के कारण जूझना पड़ा। अब बारिश के कारण फसल बर्बाद हो रही है। यहा पूरा साल किसानों के लिए परेशानी से भरा रहा।
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- गिरिराज, किसान

पक्का बांध बनना जरूरी
तिगरी धाम की तर्ज पर पक्का बांध बने बिना भू-कटान रुकना मुमकिन नहीं है। पूर्व प्रधान बबलू, इंद्रजीत सोलंकी, रामपाल, चरणसिंह राणा, धर्मसिंह का मानना है कि जनपद अमरोहा के तिगरी धाम में पक्का तटबंध बनने से गंगा का पानी उससे टकराकर गढ़ क्षेत्र में बड़े स्तर पर भू-कटान करता है, जिससे मुक्ति के लिए गढ़ की तरफ भी तिगरी धाम की तर्ज पर पक्का तटबंध बनना जरूरी।
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