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55 हजार किसानों को करना होगा गन्ना भुगतान का इंतजार

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55 हजार किसानों को करना होगा गन्ना भुगतान का इंतजार
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- सिंभावली शुगर मिल को नहीं मिलेगा सरकार की ऋण योजना का लाभ
- मिल द्वारा बैंकों से लिया गया कर्ज चुकता न होने के कारण बढ़ी किसानों की मुश्किलें
कुलदीप भारद्वाज
गढ़मुक्तेश्वर। क्षेत्र के 55 हजार से अधिक गन्ना किसानों को भुगतान के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। वजह, सिंभावली शुगर मिल को सरकार की ऋण योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। मिल द्वारा बैंकों से लिया गया कर्ज चुकता न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। ऐसे में आर्थिक तंगी से घिरे किसानों की मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं।
लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आने से वेस्टर्न यूपी की सियासत में गन्ना मुद्दा लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसके चलते बकाया गन्ना पेमेंट की अदायगी समेत किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर हाल ही में दिल्ली के राजघाट पर पहुंचने की जिद कर रही भाकियू और पुलिस प्रशासन के बीच यूपी बॉर्डर पर जोरदार भिड़ंत हुई थी। इसके मद्देनजर केंद्र और प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को राहत देने की कवायद कर रही हैं। इसी के तहत वर्तमान पेराई सत्र जल्द से जल्द चालू कराने के साथ ही आर्थिक तंगी में घिरी शुगर मिलों को कर्ज मुहैया कराकर किसानों को पेमेंट दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सिंभावली शुगर मिल प्रदेश सरकार की इस कर्ज योजना से वंचित रह जाएगी। प्रदेश के गन्ना विभाग के प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी ने चीनी एवं गन्ना आयुक्त को जो पत्र भेजा है। इसमें स्पष्ट उल्लेख किया है कि किसानों के बकाया भुगतान की अदायगी के साथ ही नियत समय पर नया पेराई सत्र चालू कराने को प्रदेश शासन शुगर मिलों को सस्ता और सुलभ कर्ज मुहैया कराएगा, लेकिन उन चीनी मिलों को कोई भी कर्ज नहीं दिया जाएगा जो बैंकों का पिछला कर्ज अब तक चुकता नहीं कर पाई हैं या उनके खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अपील दायर हो चुकी है। इस लिहाज से सिंभावली शुगर मिल शासन की इस कर्ज योजना का लाभ लेने से वंचित रह जाएगी, क्योंकि उसके खिलाफ ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने कर्ज अदायगी न होने पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूबनल में अपील दायर की हुई है। इसलिए शुगर मिल से जुड़े करीब 55 हजार गन्ना किसानों को सरकार की कर्ज वाली इस योजना के बाद भी करीब सवा दो करोड़ का पिछला पेमेंट न मिलने पर आर्थिक तंगी से निजात नहीं मिल पाएगी। इससे उन्हें अपना एक साल पुराना पेमेंट हासिल करने के साथ ही नया पेराई सत्र चालू होने में देरी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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ब्याज तो दूर मूल धनराशि के लिए भी तरस रहे किसान
गांव बदरखा के किसान मुखिया मदहत अली का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 दिनों में गन्ना पेमेंट दिलाने की जो घोषणा की थी, वह खोखली साबित हुई है। ब्याज तो दूर अब तक पिछले साल का सवा दो सौ करोड़ का असल पेमेंट भी नहीं मिल पाया है।

गांव भैना के किसान शिवकुमार तोमर का कहना है कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों को जल्द से जल्द बकाया पेमेंट की अदायगी कराने के साथ ही नियत समय पर नया पेराई सत्र भी चालू करवाए। जरूरतमंद किसानों को सस्ते रेट में कोल्हू क्रेशरों पर गन्ना बेचना पड़ रहा है।

सिंभावली के किसान कुंवर खुशनूद का कहना है कि किसानों के बकाया पेमेंट की अदायगी के लिए चाहे कुछ भी करना पड़े, लेकिन प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जल्द से जल्द ब्याज समेत पिछला पेमेंट चुकता कराकर अपना वादा पूरा करे।

भरना के किसान तेजेंद्र शर्मा कहते हैं कि भाजपा के सत्ता में आने से जो आस बंधी थी, वह अब तक पूरी नहीं हो पाई है। किसानों को अब तक अपने ही गन्ना का अरबों रुपये का पेमेंट नहीं मिल पाया है। बकाया वसूली में किसानों को गिरफ्तार करने के साथ ही उनके बिजली कनेक्शन भी काटे जा रहे हैं।
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कोट
किसानों के बकाया पेमेंट की जल्द अदायगी कराने के लिए प्रदेश शासन ने शुगर मिलों को कर्ज मुहैया कराने की योजना तैयार की है, लेकिन उसमें जो शर्त लगाई गई है उसके तहत सिंभावली शुगर मिल को कोई लाभ नहीं मिल पाएगा। मिल प्रबंधन द्वारा कर्ज चुकता न करने पर बैंकों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अपील दायर की हुई है। हालांकि इस मुद्दे पर 11 अक्तूबर को लखनऊ में होने वाली मीटिंग बेहद अहम साबित हो सकती है।
- राजीव सेठ, सचिव, सिंभावली गन्ना विकास समिति
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