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आलू में बर्बाद हजारों किसानों ने फिर खेला करोड़ों का दाव

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गिरे भाव से बर्बाद किसानों का फिर आलू पर दांव
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हापुड़। बीते सीजन में आलू की खेती कर बर्बाद हुए हजारों किसानों ने अगले सीजन में भाव चढ़ने की उम्मीद से फिर आलू पर दांव लगाया है। किसानों ने फिर शीतगृहों में रखे आलू के बीज की बुआई कर करोड़ों का दांव लगाया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार बीते वर्ष के मुकाबले 100 हेक्टेयर अधिक आलू की खेती की गई है।
बीते वर्ष जिले के 3500 हेक्टेयर रकबे में आलू की बुआई हुई थी। इस रकबे में आलू की पैदावार करीब दो लाख मैट्रिक टन रही यानि कि लगभग 40 लाख कट्टा आलू हुई थी। जिले के 14 कोल्ड स्टोरेज की आलू भंडारण क्षमता करीब 1.50 लाख मैट्रिक टन है यानि की करीब 30 लाख का कट्टा है।
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वर्तमान में भी आलू का दाम शीतगृहों पर 125 रुपये प्रति कट्टा जबकि मंडी में 150-160 रुपये/कट्टा है। किसान की मुसीबत यह है कि शीतगृह का शुल्क 125 रुपये/कट्टा है। ऐसे में किसानों को लागत भी जेब से भड़नी पड़ रही है। वर्तमान में भी शीतगृहों में करीब 4 लाख आलू रखा हुआ है।
बहरहाल आलू की खेती में बर्बाद किसानों ने फिर अगले सीजन के लिए आलू के भाव चढ़ने की उम्मीद में पहले से अधिक आलू की बुआई कर जूआ खेला है। अभी तक जिले में करीब 3600 हेक्टेयर आलू की बुआई हो चुकी है, जो बीते वर्ष के मुकाबले 100 हेक्टेयर अधिक है।

उद्यान विभाग से भी खूब बिके आलू के बीज
आलू पर मंदी के बाद भी जिले के उद्यान विभाग से किसानों ने जमकर आलू के बीज खरीदे हैं। शासन से जिले को 2500 क्विंटल आलू के बीज का आवंटन हुआ था, इसमें से 2300 क्विंटल बीज की किसान खरीदारी कर चुके हैं।

300 रुपये/कट्टा से कम दाम पर नहीं मुनाफा

खेत में किसान को एक आलू का कट्टा उत्पादित करने पर करीब 100 रुपये की लागत आती है, इसके अलावा शीतगृह शुल्क और लेबर चार्ज के बाद किसान का खर्च प्रति कट्टा करीब 200 रुपये पहुंच जाता है। इससे साफ है कि अगर 300 रुपये कट्टा आलू बिकने पर किसान को कुछ राहत मिल पाती है।
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जिला उद्यान विभाग के प्रभारी सतीश कुमार ने बताया कि किसानों को विभाग से भी काफी मात्रा में आलू का बीज दिया गया है। इस बार भी आलू की जमकर बुआई हुई है। फसल भी अच्छी होने का अनुमान है।
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