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मैं तो हूँ बेचैन मम्मी जग में आने के लिए, तुमने सौदा कर लिया मुझको मिटाने के लिए।

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‘मैं तो हूं बेचैन मम्मी जग में आने के लिए ...’
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हापुड़। हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में मोहल्ला लक्ष्मी नर्सरी श्रीनगर में निर्मल निकेतन पर विराट काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता शायर फसीह चौधरी और संचालन डॉ. अनिल वाजपेयी ने किया। इस दौरान कवियों एवं शायरों ने काव्य पाठ के माध्यम से कई गंभीर मुद्दे उठाए।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कवि गंगाशरण शर्मा ने पढ़ा, ‘मैं तो हूँ बेचैन मम्मी जग में आने के लिए, तुमने सौदा कर लिया मुझको मिटाने के लिए। ’ वरिष्ठ कवि प्रेम निर्मल ने पढ़ा, ‘ ऐसे कैसे पींजड़े, कैसे चौकीदार। राजा जी के राज में, तोते हुए फरार।’ फसीह चौधरी ने पढ़ा, ‘उगे हैं खार नफरतों की क्यारी में, किसी गुलाब पे तितली के लब नहीं मिलते।’ कवि सुभाष पायल ने पढ़ा, चले गए तो फिर मकां खाली ही कर जाते, मेरे दिल में तेरी यादें बेतरतीब बिखरी हैं।’ दिनेश त्यागी ने पढ़ा, राज सिंहासन डोलता मचता हाहाकार, पासा उल्टा पड़ गया खतरे में सरकार।’ गरिमा आर्य ने पढ़ा, ‘भर देना उजाले खुशियों के, अंधेरे में जहां किरण न हो।’ डॉ. अनिल वाजपेयी ने पढ़ा, ‘रखते हैं हर दम सदा, दो नावों में पांव। मिलती है उनको नहीं, कभी कहीं की छाँव।’ महावीर वर्मा मधुर ने पढ़ा, ‘लोग आजकल उलझ रहे बेमतलब की बातों में, उल्लुओं की घुसपैठ हो गई, अब हंसों की पांतों में।’ इनके अलावा अशोक गोयल, मुशर्रफ चौधरी, डॉ. इंतखाब आलम, अवनीश सिंह समर्थ , डॉ. नरेश सागर आदि ने भी काव्य पाठ किया।
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