तिरंगे में लिपट कर जब लाल किसी का आता है...
- संत गंगादास की स्मृति में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
कुचेसर चौपला स्थित संत गंगादास की समाधि पर उनकी पुण्य स्मृति के अवसर पर विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें दूर दराज से आए कवियों ने काव्य पाठ से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मेरठ से आए सुल्तान सिंह सुल्तान ने पढ़ा ‘रगों में आग मेरे देह में भूचाल आता है, वरन करते हैं मृत्यु वे उन्हें कब काल खाता है, उन्हीं के जानते मां बाप क्या दिल पर गुजरती है, तिरंगे में लिपट कर जब किसी का लाल आता है...’। मेरठ से आए प्रभात कुमार दीक्षित ने पढ़ा ‘जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवता रहते हैं, हम तुम क्या यह बात हमारे धर्म ग्रंथ भी कहते हैं’। धौलाना से आए कवि राजकुमार सिसौदिया ने पढ़ा ‘जीवों को नमन वीरताओं को नमन मेरा, बलिदानियों के बलिदान को नमन है, धरती का सीना चीर अन्न को उगाने वाले अन्नदाता देश के किसानों को नमन है’। सिंभावली से आए रामआसरे गोयल ने पढ़ा ‘रानी लक्ष्मी बाई ने लड़ते जब वीर गति थी पाई, बाबा गंगादास ने अपनी कुटिया में चिता सजाई, आंखों के जल से नहलाया कुटिया में आग लगाई...’। हापुड़ से आए डॉ. अनिल बाजपेयी ने पढ़ा ‘सितारा एक टूटे तो गगन खाली नहीं होता, झरे गर फूल कोई तो चमन खाली नहीं होता, हमारी मां के दामन में हैं लाखों लाल शेखर से, सपूतों से कभी मेरा वतन खाली नहीं होता..’। तेजवीर सिंह त्यागी, जय सिंह आर्य, अखिलेश द्विवेदी अकेला ने भी कविता पढ़कर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयसिंह आर्य व मंच संचालन राजकुमार सिसौदिया ने किया।