फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगा मेले में उड़ेंगी ओडीएफ की धज्जियां !ण्ण्

विज्ञापन
विज्ञापन
लाखों की भीड़, बिगाडे़ेगी ओडीएफ की तस्वीर
विज्ञापन


हापुड़। गढ़ गंगा मेले को इस बार प्रशासन महोत्सव के रूप में मानने की तैयारियां कर रहा है। लेकिन मेले में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ केंद्र सरकार की नमामि गंगे व खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) योजना की धज्जियां भी उड़ाएगी। मेला स्थल पर पहुंचने वाले करीब 20 लाख श्रद्धालु खुले में शौच जाने को मजबूर होंगे।
अबकी राजकीय गढ़ गंगा मेले को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ऐंड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। गंगा तट पर करीब 10 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में लगने वाले इस मेले में पिछली बार करीब 15 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार भी इससे ज्यादा भीड़ उमड़ने की संभावना है। लेकिन खुले में शौच पर पाबंदी को लेकर गंभीर प्रशासन मेले में इस व्यवस्था पर लापरवाह दिख रहा है। जिला पंचायत की ओर से मेले स्थल पर करीब 20 लाख लोगों के लिए महज 1600 शौचालयों की ही व्यवस्था गई है। जिनमें 1000 सीट वाले, 600 तख्तों वाले, 10 मोबाइल टायलेट शामिल हैं। ये टायलेट भी केवल मुख्य मेला स्थल पर ही मौजूद रहेंगे। इनमें से अधिकांश का प्रयोग अधिकारी और दूसरे कर्मचारी करेंगे। ऐसे में आम दर्शक के पास केवल खुले में ही शौच का विकल्प बचता है। कुल मिलाकर मेले के दौरान नमामि गंगा प्रोजेक्ट की धज्जियां प्रशासन की लापरवाही से उड़नी तय है। इस संबंध में जिला पंचायत के एई पवन कुमार ने बताया कि जिले में मौजूद संसाधनों के अलावा आसपास के जिलों और अन्य संस्थाओं से भी टॉयलेट मांगे गए हैं।
विज्ञापन


एक सप्ताह गंगा को गंदगी से बचाना होगी चुनौती
खुले में शौच को लेकर प्रशासन की ओर से इंतजाम नाकाफी है। इसके चलते गंगा को मेले के दौरान मैली होने से बचाना चुनौती होगी। मेले में 20 लाख से ऊपर श्रद्धालु करीब एक सप्ताह तक डेरा जमाते हैं। मेले को तीन सेक्टरों मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर में बांटा जाता है। इस बार मेले का आयोजन एक महोत्सव के रूप में जरूर किया जा रहा है। लेकिन खुले में शौच न करने देने के व्यापक प्रबंध न होने के कारण हालात गंभीर होंगे। जिला पंचायत राज विभाग गंगा के किनारे के 14 गांवों को ओडीएफ घोषित कर चुका है। इन गांवों की आबादी 50 हजार से ऊपर नहीं है। ऐसे में एक सप्ताह में यहां रुकने वाले 20 लाख लोग गंगा को किस स्तर तक मैला करेंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
डीएम कृष्णा करुनेश का कहना है कि सोमवार को गढ़ में मेले को लेकर बैठक आयोजित होगी। जिसमें इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा।

पालिका रेल की पटरियां को भी करेगी शौचमुक्त
हापुड़। अब शहर में रेल की पटरियां भी शौच मुक्त होंगी। नगर पालिका रेलवे की भूमि पर मोबाइल इको फ्रेंडली शौचालय स्थापित कराएगी। शासन ने सभी नगर पालिकाओं को रेलवे विभाग के अधिकारियों से समन्वय बनाकर ओडी स्पॉट चिन्हित करने के आदेश दिए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को दो अक्टूबर 2018 तक खुले में शौच मुक्त करना है। इसी को लेकर राज्य मिशन निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने एक और आदेश जारी किए हैं, जिनके तहत नगर पालिका रेलवे भूमि के आसपास खुले में शौच करने वालों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके लिए रेलवे की भूमि पर मोबाइल इको फ्रेंडली शौचालय लगवाए जाएं। इस संबंध में रेलवे विभाग के अधिकारियों से समन्वय बनाकर ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जाएगा। जहां पर पटरियों पर खुले में शौच की जाती है।
विज्ञापन

नगर पालिका ईओ जितेंद्र कुमार आनंद ने बताया कि शासन से आदेश प्राप्त हो गए हैं। जिसके आधार पर इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। रेलवे अधिकारियों से समन्वय बनाकर योजना को क्रियान्वयित किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें