सात गांवों के किसानों ने एनएच-235 का निर्माण कार्य रोका
- मिट्टी से भरे डंपरों के आगे लेटकर किसानों ने जताया विरोध
- अधिग्रहण से अधिक जमीन का मुआवजा नहीं मिलने पर फूटा गुस्सा
- एनएचएआई अफसरों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए किसान, डंपरों को कब्जे में लिया
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
एनएच-235 के लिए अधिग्रहण से अधिक जमीन कब्जे में लेकर मुआवजा नहीं दिए जाने से आक्रोशित सात गांवों के किसानों ने धनौरा गांव के पास हाईवे का निर्माण कार्य रोक दिया। किसानों ने मिट्टी से भरे डंपरों के आगे लेटकर प्रदर्शन किया और डंपर खाली कराकर कब्जे में ले लिए। आक्रोशित किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि एनएच-235 हाईवे हापुड़ की सीमा में ट्याला, असौड़ा, धनौरा, ददायरा, पटना से होकर गुजर रहा है। किसान संघर्ष समिति के जिला संयोजक जयभगवान त्यागी ने बताया कि इन गांवों की करीब 10 हजार वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहित की गई है। किसानों का आरोप है कि मुआवजा देने में घपलेबाजी हुई है। किसानों को एक समान मुआवजा नहीं मिला है। वहीं कुछ स्थानों पर अधिग्रहण से अधिक जमीन कब्जा ली गई है, जबकि मुआवजा कम मिला है। इसके अलावा नलकूप, पेड़, लाइन शिफ्टिंग का पैसा भी किसानों को नहीं मिला है।
बीते काफी समय से किसान इन मांगों के निस्तारण की आवाज उठा रहे थे, लेकिन प्रशासनिक और एनएचएआई अफसरों के आश्वासन पर वह शांत हो जाते थे। काफी दिन बाद भी मांगों का निस्तारण न होने पर सोमवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव धनौरा के बाहर सात गांवों के सैकड़ों किसान एकत्रित हुए। किसानों ने हाईवे निर्माण के लिए मिट्टी ला रहे डंपरों को रोक लिया और उनके आगे लेटकर विरोध प्रदर्शन किया। मिट्टी से भरे डंपरों को खाली कराकर किसानों ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। इस बीच मौके पर पहुंचे एनएचएआई अफसरों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान पूरा मुआवजा और शिफ्टिंग का पैसा देने की मांग पर अड़े रहे। राहत नहीं मिलने पर किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने का एलान कर दिया। धरना प्रदर्शन करने वालों में लल्लू सिंह, अमर सिंह, कालीचरण, ब्रह्म सिंह, अशोक त्यागी, नरेंद्र, अजयपाल, राजकुमार, करन, आसु, सुदेश, रोहताश, अमित, मोहित, सुरेंद्र, पंकज, सतीश आदि मौजूद रहे।