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हापुड़ जिले में दो माह से 1.07 लाख बच्चे पोषाहार से वंचित

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जिले में दो माह से 1.07 लाख बच्चे पोषाहार से वंचित
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हापुड़। अफसरों की लापरवाही के कारण पिछले दो माह से हापुड़ जिले के 1.07 लाख बच्चे और करीब 25 हजार गर्भवती महिलाओं को पोषाहार नहीं मिला है। उधर जिले की 746 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी पिछले 5 माह से मानदेय भी नहीं मिले हैं। ऐसे में केन्द्र सरकार की इस योजना को पलीता लग रहा है।
केन्द्र और प्रदेश सरकार अपने बजट में बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के नाम पर हजारों करोड़ के बजट का प्रावधान करती है। इसके बावजूद प्रदेश के आला अफसरों की लापरवाही के कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा घरों में करीब 1.07 लाख मासूम बच्चों को रोज सुबह दिये जाने वाला पोषाहार पिछले दो माह से नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं जिले की 25 हजार गर्भवती महिलाएं भी पोषाहार से वंचित है।
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गर्भवती महिलाओं को पोषाहार इसलिए दिया जाता है ताकि उनके गर्भ में पल रहा बच्चा और वह स्वस्थ रहे। जिन गर्भवती महिलाओं को दो माह से पोषाहार नहीं मिला हो, उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा, इसका अंदाज लगाया जा सकता है।
हापुड़ जिले में 0 से 3 साल आयु के 58000 बच्चे हैं। 3 से 6 साल तक के 49054 बच्चे हैं जबकि करीब 25 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इतना ही नहीं 887 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं जिन पर 746 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत हैं। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार नहीं मिलने के कारण वहां सुबह पहुंचने वाले बच्चों की संख्या घटने लगी है।
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इस संबंध में कार्यवाहक जिला कार्यक्रम अधिकारी ज्योति बाला का कहना है कि दो बार शासन को पोषाहार और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बकाया मानदेय के लिए बजट की डिमांड भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक पोषाहार नहीं आया है। न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय मिला है। उनका दावा था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सिर्फ दो माह का मानदेय नहीं मिला।
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