फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार द्वारा उद्योगों में जान फूंकने की तैयारी

विज्ञापन
विज्ञापन
लघु व कुटीर उद्योग को ‘संजीवनी’ देगी सरकार
विज्ञापन


- बंद हो चुकी इकाईयों को फिर से शुरू करने के लिए मिलेगी आर्थिक मदद
- हैंडलूम, बर्तन, कोन, प्लाई व बंधेल कारोबार सहित अन्य उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से स्किल डेवलपमेंट को जोड़कर खास प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
आर्थिक चुनौतियों या अन्य सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहे जिले के लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रदेश सरकार ‘मदद’ की संजीवनी देकर उसमें जान फूंकने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार बंद या सुस्त पड़ चुकी इकाईयों को फिर शुरू कराने के लिए सहायता और प्रोत्साहन देगी। इसके लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से स्किल डेवलपमेंट को भी जोड़कर खास प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि ऐसे उद्योगों को विकास का पंख लगाया जा सके। शहर में अब तक 500 से अधिक लघु कुटीर उद्योग दम तोड़ चुकी हैं।
दरअसल, शहरम में युवाओं को रोजगार और आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए सरकार ने पहल की है। योजना के अनुसार किसी भी कारण से बंद कुटीर इकाइयों को चालू किया जाएगा। सरकार ने योजना में हैंडलूम, बर्तन, कोन, प्लाई व बंधेल कारोबार सहित दूसरे उद्योगों को शामिल किया है। इसके तहत इकाइयों के बंद होने के कारणों का पता किया जाएगा। बाद में इकाइयों के श्रमिक और संचालकों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को स्किल डेवलपमेंट के जरिए विशेष प्रशिक्षण देकर आर्थिक मदद दी जाएगी। हापुड़ में बर्तन, धागा लपेटने के लिए बनने वाली कोन व प्लाई का कारोबार के साथ पिलखुवा में हैंडलूम कारोबार प्रमुख है। सरकार प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से मदद देती है तो इन उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन

कुल मिलाकर शासन के आदेशों के बाद जिला प्रशासन ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। इकाईयों का डाटा जुटाया जा रहा है। इकाईयों में दोबारा जान फूंकने के लिए उन्हें आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जाएगी।
विज्ञापन

डीएम कृष्णा करुनेश ने बताया कि प्रदेश सरकार उद्योगों में जान फूंकने के लिए पहल की है। इकाईयों का डाटा जुटाकर शासन को भेजा जाएगा।
आईआईए के चैप्टर अध्यक्ष धीरज चुग का कहना है कि उद्योगों की हालत पहले से ही खस्ता थी। नोटबंदी और जीएसटी लगने के बाद और ज्यादा बुरे हालात हो गए हैं। कितनी ही इकाईयां बंदी की कगार पर हैं।

जिले में उद्योग की स्थिति
बड़े उद्योग - 750
मध्यम उद्योग-2500
कुटीर उद्योग- 700
श्रमिकों की संख्या- 60 हजार
बंद हो चुकी इकाईयां- 500
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें