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चुनाव बाद प्रत्याशी और कर्मचारियों ने फरमाया आराम

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दिन भर जीत-हार की गुणा-भाग में लगे रहे प्रत्याशी
- फोन पर समर्थकों से लिया स्थिति का जायजा
हापुड़। पिछले कुछ दिनों से जारी चुनावी गहमागहमी के बाद बृहस्पतिवार को प्रत्याशियों ने अपने परिवार को समय दिया। इस दौरान प्रत्याशी फोन पर समर्थकों से स्थिति का जायजा लेकर जीत-हार की गुणा-भाग में लगे रहे। इस दौरान सभी प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए है। चुनावी कार्यालयों पर भी वीरानी छाई रही।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद पिछले एक महीने से चुनावी गतिविधियां चल रही थी। प्रत्याशी प्रचार प्रसार में जुटे थे तो कर्मचारी भी शांतिपूर्वक चुनाव कराने में लगे रहे। कभी प्रशिक्षण तो कभी दूसरी तैयारियों के कारण कर्मचारियों की रातों की नींद उड़ी पड़ी थी। प्रचार में लगे प्रत्याशियों को भी काफी थकावट हो रही थी। बुधवार को चुनाव संपन्न होने के सभी ने राहत की सांस ली है। बृहस्पतिवार को सरकारी कार्यालय बंद रहे और कर्मचारियों ने पूरे दिन अपने घरों पर आराम फरमाया। प्रत्याशियों का भी पूरे दिन आराम में गुजरा लेकिन इस दौरान उनकी धड़कने तेज रही। अधिकतर प्रत्याशी अपनी अपनी जीत के लिए सुनिश्चित दिखाई दिए और समर्थकों से घिरे रहे। समर्थक अपने अपने गणित के हिसाब से अपने प्रत्याशी को जिताते नजर आए।
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प्रत्याशियों ने परिवार के साथ बिताया समय
गढ़मुक्तेश्वर। निकाय चुनाव का मतदान होने के बाद अब जीत-हार को लेकर माथापच्ची चल रही है। प्रत्याशी कागजी गुणा-भाग में लगे रहे। सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे करते नजर आए।
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निकाय चुनाव में 70 फीसदी मतदान पर भले ही स्थानीय प्रशासन अपने प्रयासों को सफल मानकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन मतदान बढ़ने से चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशी और उनके समर्थकों में सियासी समीकरण में उलटफेर होने की आशंका से अंदरूनी तौर पर बेचैनी का माहौल भी है। भाजपा नेता सुशील बंसल, अंकुर त्यागी, योगेश वर्मा मतदान में हुई बढ़ोतरी को केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा गढ़-ब्रजघाट को दी गई सौगात का परिणाम मानकर बेहद खुश दिखाई दे रहे हैं। तो सपा के जिला महासचिव साजिद चौधरी, नगराध्यक्ष शहजाद चौधरी, राकेश चौहान मतदान की बढ़ोतरी को केंद्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों का परिणाम बताकर जीत का दम भर रहे हैं। वहीं बसपा जिलाध्यक्ष कुंवरपाल निमेष का कहना है कि मोदी और योगी की विफलता से नाराज होकर सभी वर्गों से वोटिंग प्रतिशत बढ़ाया है, जो बसपा के पक्ष में गया है। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी भी पिछले 15 सालों से जनता के बीच रहकर सामाजिक कामों से जुड़ा रहने का दंभ भरते हुए अपनी जीत को सुनिश्चित मानकर चल रहे हैं। कुल मिलाकर मतदान होने के बाद अब सियासी दलों के बीच बहस का दौर और कागजी गुणा भाग का खेल प्रारंभ हो चुका है, जिसमें किसी भी प्रमुख सियासी दल के समर्थक अपनी हार मानने को तैयार नहीं हैं। पार्टियों से जुड़े समर्थकों के दावे-प्रतिदावों से आम वोटर मतदान होने के बाद भी संशय की स्थिति से नहीं उबर पा रहा है। राजकुमार लालू, राकेश बजरंगी, मदनपाल चौधरी का कहना है कि स्थिति साफ करने की बजाए सियासी दलों के कार्यकर्ता और निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थक अब भी पसोपेश में उलझा रहे हैं।
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