जहर उगल रहे कोल्हू, घुट रहीं सांसें
हापुड़। एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण से एनजीटी सख्ती से निपटने के मूड में है। क्षेत्र में औद्योगिक इकाईयों को बंद करा दिया गया है। हालांकि इन प्रयासों को प्लास्टिक और रबर के वेस्ट से दहक रहे क्षेत्र के कोल्हू पलीता लगा रहे हैं। जिले में करीब ढाई सौ कोल्हू दिन-रात काला धुआं उगल रहे हैं। उधर, धुंध से सोमवार को शहर में पीएम 2.5 का स्तर 260 से घटकर 240 पर आ गया। इससे लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है।
एक सप्ताह से दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर है। हालातों की गंभीरता को देख एनजीटी ने दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण उगल रहे फैक्ट्रियों को बंद करा दिया हैं। इस सब के बीच देहात क्षेत्रों में कोल्हुओं में प्लास्टिक वेस्ट जलाया जा रहा है। इससे निकला काला धुआं वातावरण को और प्रदूषित कर रहा है। इन कोल्हुओं पर न कोई पाबंदी है और न ही कोई नियम है।
पहले से ही प्रतिबंधित हैं कोल्हू
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पुराने तरीके से चलाए जा रहे कोल्हुओं पर पहले से ही प्रतिबंध है। लेकिन इससे किसानों के प्रभावित होने के कारण कार्रवाई नहीं की जाती। कोल्हू चलाने के लिए कई तकनीकी मानक तय किए गए हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अमित शर्मा का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों के साथ प्रदूषण फैला रहे कोल्हुओं पर शिकंजा कसा जाएगा।
कोल्हू का प्रदूषण में 15 फीसदी भागीदारी
एसेसेस भौतिकी मंच के प्रवक्ता अजय कुमार मित्तल की माने तो कोल्हू में ईंधन के रूप में टायर, पॉलीथिन, गीली लकड़ी, खराब गन्ना एवं अन्य प्लास्टिक की वस्तुएं जलाने से भारी मात्रा में कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन एवं सल्फर डाई आक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। रही सही कसर कई जगहों पर पेटकॉक एवं फर्नेस आयल का इस्तेमाल पूरा कर देता है। जिसमें कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा हजारों गुना ज्यादा निकलती है। प्रदूषण की मात्रा में करीब 15 प्रतिशत हिस्सेदारी कोल्हुओं से निकलने वाले काले धुंए की है।
सोमवार को कुछ घटा प्रदूषण -
सोमवार को दिन में स्मॉग घटने के कारण पीएम 2.5 का स्तर 260 से घटकर 240 पहुंच गया। मौसम विज्ञानी मनोज आत्रेय के अनुसार रात के समय स्मॉग के बजाय कोहरे का असर है। रात के समय कोहरा पड़ रहा है। इससे तापमान में भी गिरावट आई है। सोमवार को शहर का अधिकतम तापमान 27.3 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
ये हो रही बीमारी --
डा. जीवोत्तम नारंग के अनुसार टायर एवं पॉलीथिन जलाने से हार्ट अटैक, कैंसर, अस्थमा, सीओपीडी, किडनी, गंजापन, गले की एलर्जी के मरीज बढ़ रहे हैं। धुएं के कण नाक में पहुंचकर फेफड़ों की नलिकाओं में सूजन पैदा कर रहे हैं।
सीएमओ डा. एके सिंह का कहना है कि वातावरण में फैले प्रदूषण में केवल वाहनों से निकला धुआं ही नहीं है। कोल्हुओं के काले धुएं की मात्रा भी इसमें मिलने से रोग पनप रहे हैं। इससे प्रभावित लोगों को अस्थमा, सीओपीडी आदि रोगों का खतरा है। लोग ऐसे में खुले में टहलने से परहेज करें।