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गंगानगरी के आश्रम की फर्जीवाड़े से खरीद फरोख्त हुई

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फर्जी रुप से आश्रम की बिक्री मामले में साध्वी ने अदालत में लगाई गुहार
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगानगरी के आश्रम की फर्जीवाड़े से खरीद फरोख्त होने के मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर साध्वी ने अदालत में याचिका डाली है। अदालत ने गढ़ पुलिस को आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।
बाबा लालदास ने ब्रजघाट गंगानगरी में एक आश्रम का निर्माण कराया था, जिन्होंने अपनी शिष्या बनारसो बाई की सेवाभाव से प्रसन्न होकर आश्रम से जुड़ी संपत्ति का पूर्वी भाग उसे दे दिया था। जिसमें बनारसो देवी ने अपने परिश्रम से भूतल पर 23 कमरे और शौचालयों का निर्माण कराया था। बनारसो बाई ने शिष्या बसंती देवी के सेवाभाव से खुश होकर नोटेरी वसियत के द्वारा अपनी संपत्ति 17 मई 1999 में उसे दे दी थी। बनारसो बाई की मौत होने के बाद उक्त आश्रम पर बसंती देवी मालिक और काबिज चली आ रही है, जिसने हापुड़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम नवीन कुमार की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर उल्लेख किया है कि समरजीत नामक व्यक्ति ने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसकी संपत्ति 20 मार्च 2017 को रजिस्टर्ड बैनामे द्वारा महज 16 लाख में बेच दी थी, जिसकी असल कीमत 77 लाख रुपये से भी अधिक है।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम हापुड़ नवीन कुमार ने वादिनी पक्ष के तर्क सुनने के बाद गढ़ पुलिस को समरजीत आदि के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
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इंस्पेक्टर एचआर यादव का कहना है कि फिलहाल उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन अगर अदालत से कोई आदेश हुआ है तो उसका अविलंब पालन कराकर रिपोर्ट दर्ज होगी।
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