गंगा की जलधारा के बीच रेतीले टापू बने जानलेवा
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा की जलधारा के बीच रेतीले टापू में बने अस्थाई स्नानघाट श्रद्धालुओं की लिए जानलेवा बन रहे हैं। ज्येष्ठ दशहरा मेले में भी ये घाट अनहोनी की वजह बन सकते हैं। क्योंकि श्रद्धालुओं के डूबने की सर्वाधिक घटना इन्हीं के आसपास होती हैं। जबकि हादसों के बाद भी पुलिस और स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं।
मोक्षदायिनी गंगा में स्नान करने लाखों श्रद्धालु आते हैं। अधिकांश लोग यहां की भौगोलिक स्थिति से अनभिज्ञ होते हैं, जो किनारे पर भीड़भाड़ से बचने को नाव में सवार होकर रेतीले टापू में बने अस्थाई स्नानघाटों पर पहुंच जाते हैं। यहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होेते जिसके कारण श्रद्धालु स्नान के दौरान डूब जाते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो एक साल में अधिकांश मौत इन्हीं रेतीले टापू वाले स्नान घाटों के आसपास हुई हैं।
ब्रजघाट में सोमवार को तीन दिवसीय ज्येष्ठ दशहरा मेला प्रारंभ हो गया है, जिसमें दस लाख से भी अधिक भक्तों का आगमन होने का अनुमान है। लेकिन इसके बाद भी पुलिस समेत स्थानीय प्रशासन इन अस्थाई स्नान घाटों को हटवाने को तैयार नहीं हैं। दो दिन में गंगा का जलस्तर भी लगभग 50 सेंमी बढ़ गया है जिससे गंगा का बहाव भी तेज हो गया है। ऐसे में अगर अगर यहां कच्चे स्नानघाट नहीं हटवाए तो इसे प्र्रशासन की लापरवाही ही कहेंगे।
श्रद्धालुओं को रेतीले टापू पर ले जाते हैं मल्लाह
कमाई के लालच में अधिकांश मल्लाह श्रद्धालुओं को भीड़ भाड़ से बचने की नसीहत देकर रेतीले टापू पर बने अस्थाई स्नान घाटों में ले जाते हैं, जहां गहरे पानी में श्रद्धालु डूब जाते हैं।
एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी और सीओ अशोक शुक्ल का कहना है कि रेतीले टापू में लगे स्नानघाटों को हटवाने के लिए कड़ा अभियान चलाया जाएगा।