जिसने गुजारी जिंदगी रमजान की तरह....
हापुड़। साहित्यिक संस्था काव्यदीप के तत्वावधान में बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास में प्रसिद्ध शायर फसीह चौधरी के आवास पर काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें प्रसिद्ध कवि, शायरों ने अपनी रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में डा. अशोक मैत्रेय ने पढ़ा डगर डगर अब आग है, दिशा दिशा तेजाब, जहर भरी चलती हवा, जहरीला है आज। फसीह चौधरी ने पढ़ा दर्द बढ़ता है जो भी बढ़ने दो, दरिया रुकता कहां है बहने दो। राज चैतन्य ने पढ़ा द्वार जन्नत का खुलेगा आखिर उसके वास्ते, जिसने गुजारी जिंदगी रमजान की तरह।
विजय वत्स ने पढ़ा मोहब्बत हमें छलेगी कभी सोचा न था, किनारे कश्ती डूबेगी कभी सोचा न था।
आशुतोष आजाद ने पढ़ा पत्थरों से दिल लगाना सीख लो, हादसों में मुस्कराना सीख लो, खत्म यूं ही जिंदगी हो जायेगी, प्यार के कुछ गीत गाना सीख लो।
मोहन लाल तेजियान ने पढ़ा हवा चली कैसी प्रभु मन में पड़ी दरार, एक छलावा सब कहीं कहां दिलों में प्यार। महावीर वर्मा मधुर ने पढ़ा झूठी जग ही हमदर्दी ने दिल में ऐसे घाव दिए। अविनाश सिंह, मुशर्रफ चौधरी, डा.रश्मि शर्मा, रामवीर आकाश, मनीषा गुप्ता, महेश वर्मा, डा.मियां मेरठी, राकेश कुमार, फराज चौधरी, इंदु मित्तल, नगेंद्र शिशौदिया, उमेश शर्मा, ऊषा इंदू, गंगाशरण शर्मा ने भी कविता पढ़ी।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ विजय वत्स ने मां सरस्वती वंदना से किया। गुलजार काजमी के द्वारा अल्लाह की शान में हम्द गायी गई। नदीम चौधरी, सुभान चौधरी, बदर कुरैशी, फजलुर्रहमान का सहयोग रहा।