मानव जीवन की आचार संहित है धर्म : जगराम शर्मा
हापुड़। धर्म मानव जीवन की आचार संहित हैं। आज के व्यक्ति की मुस्कान गुम हो गई है और मानव दुखी है। सांसारिक चकाचौंध में आज का मानव निज स्वरूप को भूला बैठा है। अपने निजी स्वरूप को बनाए रखने के लिए धर्म का सहारा लेना होगा।
उक्त विचार गांव कस्तला कासमाबाद में चल रहे सुंदरकांड पाठ में आचार्य जगराम शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सुंदर कांड का पाठ करने से मनुष्य में धर्म की आस्था बढ़ती है और हर कर्म संभव हो जाता है। हनुमान जी सदा वीरता के कार्य कर दिखाते हैं और असंभव को संभव कर देते हैं। लंका जलाते समय रावण कुछ नहीं कर सका और हनुमानजी ने सारी सोने की लंका जला दी। श्रीराम भक्त विभीषण लंका नगरी के राजा घोषित हुए और रावण का वध हुआ। धर्म में आस्था रखने वाले मनुष्य का जीवन सदा सुखी रहता है। धर्म सही जीवन जीने की आधारशिला है। भजनों की धुन पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।
मौके पर परमानंद, कमल, विमल, अमन, गौरव, ओंमकार, कुलदीप सिंह, सुभाष तोमर, मुरारी लाल, शिव सिंह, रमेश तोमर, कुसुमलता तोमर, जीतपाल तोमर, भृगु, कांति शर्मा आदि मौजूद रहे।