संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। गढ़ खादर क्षेत्र के 14 गांवों में ईको सेंसिटिव जोन के लिए 1835 हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया गया है। इको जोन की घोषणा होने पर प्रदूषण फैलानी वाली फैक्ट्रियों की स्थापना पर रोक लगेगी। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने पांच जिलों के जिलाधिकारी व जिला प्रभागीय वन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर निर्देश दिए हैं।
जिला प्रभागीय वन अधिकारी संजय कुमार मल्ल ने बताया कि इको जोन की घोषणा होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री लगाने के लिए कोई अनुमति नहीं मिल सकेगी। नई औद्योगिक ईकाइयों का विस्तार नहीं होगा। इको सेंसिटिव जोन का मुख्य उद्देश्य पेड़ पौधों और वन्य जीवों के सरंक्षण करना है। पेड़ काटने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव की अनुमति से ही पेड़ काटे जा सकेंगे। जल्द ही इसकी घोषणा होगी और मानचित्र भी स्वीकृत होगा।
ईको सेंसिटिव जोन में हो सकेंगे ये कार्य
प्रदूषण को नुकसान नहीं पहुंचाने वाले कार्य किए जा सकेंगें। इसके अलावा लघु, कुटीर और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने वाले कार्य किए जा सकते हैं। इको सेंसिटिव जोन के अंदर कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अगरबत्ती उद्योग, लकड़ी व बांस, सवई घास या कास के घास से कई प्रकार के टोकरी, टोपी, बांसुरी व सजावट के सामग्री बनाए जा सकेंगे।
ईको सेंसिटिव जोन में ये कार्य रहेंगे प्रतिबंध
इको सेंसेटिव जोन में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधि, पक्के आवास, पक्का निर्माण, कंकरीट का काम, खनन, प्रदूषण फैलाने वाले कार्य, ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण फैलाने वाले काम नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा आरा मशीन भी नही लग सकेगी।
14 गांवों में चिन्हित किया ईको जोन
-
गांव कल्याणपुर, रवासन उर्फ सौगढ़, सैदपुर, हैदरपुर, कुलपुर, कोथला बांगर, शाहपुर चौधरी, गढ़ खादर, गढ़ बांगर, बागड़पुर, खडग़पुर, झड़ीना, अल्लबख्शपुर, आलमगीरपुर।