जयशंकर प्रसाद के हिंदी साहित्य में स्थान पर गोष्ठी
हापुड़। हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को नई शिवपुरी में जयशंकर प्रसाद का आधुनिक हिंदी साहित्य में स्थान और महत्व विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने विचार रखे।
मुख्य वक्ता डा. तिलक सिंह ने कहा कि जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिंदी साहित्य की छायावादी काव्यधारा के प्रवर्तक रचनाकर रहे हैं। इन्होंने कविता, कहानी, निबंध, नाटक, उपन्यास, आलोचना और पत्रकारिता के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित किए, आंसू, झरना, लहर, कालजयी काव्य कृतियों की रचना की। इनका प्रबंध काव्य कामायनी आधुनिक हिंदी काव्य की अन्यतम रचना है। चंद्रगुप्ता, स्कंदगुप्त आदि इनके लोकप्रिय ऐतिहासिक नाटक है। इन नाटकों के माध्यम से इन्होंने भारत के प्राचीन इतिहास की खोज की।
डा. अब्दुल जलील ने कहा कि जयशंकर प्रसाद ने तितली, कंकाल, इरावती उपन्यासों की रचना करके भारतीय समाज और इतिहास को नई दिशा दी है। डा. कुंवरपाल शर्मा, डा. जीत सिंह, डा. महेश चंद शर्मा, डा. सत्यप्रकाश सागर, डा. इंदुगोस्वामी, डा. सीमा शर्मा, प्रोफेसर देवानंद और शिक्षक दिनेक कुमार ने विचार रखे।