अब जिले में नहीं कटेंगे बूढ़े हो चुके फलदार वृक्ष
- उद्यान विभाग बूढ़े और रोग ग्रस्त पेड़ों का करेगा उपचार
- उपचार के बाद वृक्षों के फल देने की सुधरेगी गुणवत्ता
- किसानों को मिलेगा अनुदान, दो वर्ष में फिर से भरपूर फल देंगे पेड़
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
आपके खेतों में लगे फलदार वृक्ष यदि बूढ़े हो चुके हैं या किसी बीमारी के कारण खराब हो गए हैं तो आप उन्हें काटें नहीं बल्कि उद्यान विभाग में संपर्क करें। विभागीय अधिकारी इन पेड़ों का उपचार कर, उन्हें फिर से फलदार बनाएंगे। साथ ही किसानों को 20 हजार रुपये/हेक्टेयर की दर से अनुदान भी मिलेगा। महज दो वर्ष में पेड़ फिर से भरपूर फल देने लगेंगे।
जिले में आम, अमरूद की बागवानी बड़े पैमाने होती है, लेकिन अनेक बागों में पेड़ बूढ़े होने के कारण वह पर्याप्त फल नहीं दे पाते हैं। इसके चलते किसान इन्हें कटवा देना ही उचित समझते हैं। इतना ही नहीं किसान इनके स्थान पर नया पौधा लगाते हैं तो वह पांच साल में फल देने के लिए तैयार होता है। इतने समय किसान को पेड़ की देखरेख में समय बीताना पड़ता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अब शासन ने बूढ़े या बीमारी से ग्रस्त पेड़ों का उपचार करवाने का निर्णय लिया है। उद्यान विभाग के अफसरों को जिलेभर में किसानों से संपर्क कर, इस योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही किसानों को 20 हजार रुपये तक अनुदान भी दिया जाएगा।
ऐसे किया जाएगा उपचार
बूढ़े हो चुके पेड़ों को चार मीटर की ऊंचाई से पूरी तरह काट दिया जाएगा। इसके बाद पेड़ पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का घोल लगाया जाएगा। इसके साथ गाय का ताजा गोबर भी लगाया जा सकता है। दो वर्ष तक पेड़ की पूरी देखरेख की जाएगी। इस विधि से पेड़ों का उपचार करने के बाद वृक्ष पर लगने वाले फलों की गुणवत्ता में भी काफी सुधार आएगा। इतना ही नहीं पेड़ की फल देने की क्षमता भी बढ़ जाएगी। इस योजना के तहत उद्यान विभाग के अफसर सिर्फ आम और अमरूद के पेड़ों का उपचार कर सकेंगे। जिले में भी इन्हीं की बागवानी बड़े पैमाने पर होती है।
पहले आओ पहले पाओ के आधार पर मिलेगा लाभ
उद्यान विभाग से इस योजना का किसानों को लाभ पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। किसान विभाग में रजिस्ट्रेशन करा इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
यह योजना विभाग से लागू कर दी गई है। लाभार्थी किसानों को 20 हजार रुपये/हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। - एसके शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी