23 जिलों में कभी भी कांप सकती है धरती
हापुड़। गिरते भूगर्भीय जलस्तर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 23 जिले डेंजर जोन में हो गए हैं। आए दिन हो रही धरती के अंदर कंपन की जांच में पता चला है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में कभी भी धरती कांप सकती है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इन जनपदों से भूगर्भ के विश्लेषण संबंधित रिपोर्ट तलब की है।
छह माह पहले केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने पश्चिम के कई जिलों में सर्वे किया था। रिपोर्ट के मुताबिक गंगा यमुना दोआब भूमि के बीच के 23 जिलो में भी तेजी से जलस्तर गिरा है। हापुड़ में भी कुछ ब्लाक डार्क जोन में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार भूजल स्तर गिरने से भूमि के अंदर का संतुलन गड़बड़ा गया है, जिससे स्टोन की स्थिति मजबूत हो रही है। खाली हुए स्थान की ओर प्लेट सरक रही हैं, जिससे कभी भी धरती हिल सकती है। बड़ी बात है कि उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संपदा के मामले में मालामाल इस क्षेत्र पर भूकंप का अधिक खतरा है। भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार जमीन के अंदर बनी प्लेट कमजोर होने के कारण लगातार खिसक रही है। इसके अलावा गंगा और यमुना का प्रदूषण भी बड़ा खतरा है। नदी की सतह पर गंदगी और सिल्ट जमने से भूजल रिचार्ज का स्तर घट गया है।
भूगर्भीय जल के अत्यधिक दोहन पर लगे रोक -
इस गंभीर समस्या से बचना है तो लोगों को चाहिए कि वे भूगर्भीय जल के अत्यधिक दोहन पर रोक लगाएं। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने डेंजर जोन में शामिल 23 जनपदों को आकस्मिक योजना बनाने का निर्देश दिया है। योजना के अनुसार चिन्हित क्षेत्र में डैम की स्थिति का पूरा रिकार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही आपात स्थिति में जानमाल की सुरक्षा को लेकर भी प्लान प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाएगा।
डेंजर जोन में शामिल जनपद-
हापुड़, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बागपत, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, लखीमपुर खीरी, रामपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धांर्थनगर, पीलीभीत, बरेली, अलीगढ़, मथुरा प्रमुख रूप से शामिल है।
डीएम कृष्णा करुनेश का कहना है कि संबंधित विभागों को इस संबंध में योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा शासन ने इस संबंध में जो सूचनाएं मांगी हैं उन्हें एकत्र कर उपलब्ध कराया जा रहा है।