जिले की सीमा विस्तार की मांग बन सकती है मुद्दा
हापुड़। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही मतदाता भी अपनी लंबित मांगों को टटोलने लगे हैं। इन्हीं में एक मांग हापुड़ जिले की सीमा के विस्तार की है जो मेरठ रोड पर सिर्फ 6 किलोमीटर पर समाप्त हो जाती है। इससे उद्यमियों को दो जिलों के अफसरों की मार झेलनी पड़ती है तथा आधा दर्जन से अधिक गांवों की जनता भी परेशान है।
हापुड़ जिले की सीमा का विस्तार किए जाने की मांग नया जिला बनने के बाद से ही उठती रही है। इतना ही नहीं शासन में मांग पहुंचने पर जिला प्रशासन से भी इस बाबत रिपोर्ट मांगी गई थी जिसमें मेरठ रोड और बुलदंशहर रोड पर हापुड़ जिले की सीमा बढ़ाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था। हापुड़ जिला बनाओ समिति के संयोजक डा. एसके कौशिक ने भी कई बार शासन को पत्र भेजे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल आजाद का कहना है कि हापुड़ जिले के विकास के लिए जिले की सीमा का विस्तार होना जरूरी है। हालांकि आगामी लोकसभा चुनाव में हापुड़ और बुलदंशहर रोड पर हापुड़ जिले की सीमा बढ़ाए जाने की मांग भी मुद्दा बन सकती है।
उद्यमी अशोक छारिया का कहना है कि धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र का अधिकांश भाग मेरठ जिले में तथा आंशिक भाग हापुड़ जिले में आता है जबकि अधिकांश उद्यमी हापुड़ के हैं। बिजली भी हापुड़ से मिलती है। हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण और केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क हापुड़ के अधीन भी यह क्षेत्र आता है। जबकि जिला उद्योग केन्द्र, जिला पंचायत, पुलिस महकमा और जिला प्रशासन मेरठ के अधीन यह क्षेत्र है। उनका मानना है कि कम से कम 7 किलोमीटर हापुड़ जिले की सीमा बढ़ाई जाए है।
मेरठ रोड के गांव कैली, पांची, कूड़ी, कबट्टा, धीरखेड़ा, नया गांव, अतराड़ा, रजपुरा गांवों की जनता काफी पहले से यह मांग करती रही है कि उनके गांवों को हापुड़ जिले में शामिल किया जाए। इसका मुख्यालय सिर्फ 9 किलोमीटर तक पड़ता है। जबकि मेरठ के लिए 22 किलोमीटर जाना पड़ता है।
गांव कैली के सुनील त्यागी, राजेश शर्मा, कूड़ी के सत्ते, अतराड़ा के प्रधान देवेन्द्र त्यागी आदि ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के सामने हापुड़ जिले की सीमा बढ़ाए जाने का मुद्दा भी रखा जाएगा।