क्रय-विक्रय समिति के चुनाव में जमकर हंगामा
हापुड़। सहकारी क्रय-विक्रय समिति के सभापति और उप सभापति पद के चुनाव में जमकर हंगामा हुआ। एक प्रत्याशी और उसके समर्थकों ने भाजपा के कुछ नेताओं पर चुनाव अधिकारी पर दबाव बनाकर अपने साथ ले जाने का दबाव बनाया। इसके बाद चुनाव को स्थगित कर दिया गया। एक पक्ष ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को फैक्स किया है।
बुधवार को सहकारी क्रय-विक्रय समिति हापुड़ के सभापति और उपसभापति पद के लिए चुनाव होना था। सुबह के समय नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। भाजपा की ओर से ऋषिपाल चौहान सभापति पद और उप सभापति के पद पर रवींद्र सिंह प्रत्याशी थे। जबकि शीशपाल चौधरी और रालोद गुट के डेलीगेट्स में भाजपा बाबूगढ़ मंडल के अध्यक्ष पवनवीर चौधरी ने सेंधमारी कर दी। उन्होंने खुद सभापति पद व अजयवीर सिंह को उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार घोषित करते हुए नामांकन दाखिल कर दिया। मतदान शाम चार बजे होना था।
आरोप है कि चुनाव में भाजपा के ऋषिपाल गुट का पलड़ा कमजोर होता देख उसके समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद गहमागहमी शुरू हो गई। दोनों ओर से जमकर नारेबाजी की गई। भाजपाइयों ने चुनाव को निरस्त करने की मांग की। इसके बाद चुनाव अधिकारी ने सहकारी समिति के बाहर चुनाव स्थगित करने का नोटिस चस्पा कर दिया और एक पक्ष की कार में बैठकर चले गए।
शीशपाल चौधरी एवं पवनवीर चौधरी गुट ने भाजपाइयों पर दबाव बनाकर चुनाव स्थगित कराने और चुनाव अधिकारी को अगवा करने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मामले की शिकायत चुनाव आयोग को फैक्स कर दी की गई है।
इस संबंध में एडीएम रजनीश राय का कहना है कि मामले की जानकारी कराई जा रही है। नियमविरुद्ध गतिविधि नहीं होने दी जाएगी।
कुल 11 थे डेलीगेट्स --
चुनाव मेें वोटिंग करने वालों कुल 11 डेलीगेट्स थे। इनमें पवनवीर, अजयवीर, राशिद अली, नंदराम, श्याम सिंह, अंजू, रविंद्र कुमार, राजीव सिसौदिया, ऋषिपाल, मोहन सिंह, सोमवती। इनमें दो डेलीगेट्स मोहन सिंह और सोमवती शासन द्वारा नामित थे।
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भाजपाइयों में गुटबाजी खुलकर आई सामने
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। सहकारी क्रय-विक्रय संघ हापुड़ के चुनाव को लेकर भाजपाइयों में जमकर गुटबाजी सामने आई है। दरअसल इस चुनाव के लिए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता को जिला हापुड़ का चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया था। वह किसान सेवा सहकारी समिति चुनाव में भी अपनी दबंगई दिखा चुके हैं।
भाजपाइयों का ही आरोप है कि बुधवार को भी उक्त नेता ने अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपने को दे, वाली कहावत चरितार्थ की। क्योंकि सभापति और उपसभापति पद पर उक्त नेता ने अपने चहेते लोगों को भाजपा की ओर से पदाधिकारी बनवा दिया। जबकि दो बार बाबूगढ़ मंडल से भाजपा के अध्यक्ष रह चुके पवनवीर यादव सभापति पद के प्रमुख दावेदार थे। भाजपा की ओर से टिकट नहीं मिलने पर पवनवीर ने सपा रालोद के डेलीगेट से हाथ मिला लिया और भाजपा प्रत्याशी को झटका दे दिया। हालांकि मतदान से पहले ही भाजपाइयों ने चुनाव स्थगित कराकर सत्ता की खनक का खुला प्रदर्शन किया है। हालांकि इस मामले में चुनाव अधिकारी नप सकते हैं।