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अब गन्ने की शरदकालीन बुआई कर मालामाल होंगे किसान

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अब गन्ने की शरदकालीन फसल से कमाई करेंगे धरती पुत्र
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अब किसान अपने ही हाथों से गन्ने के पौधे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकेंगे। नंगला मल शुगर मिल ने इसके लिए पहल की है। इस पहल के तहत किसानों से गन्ने की नर्सरी तैयार कराई जा रही है। किसान भी इस आधुनिक पद्धति को तवज्जों दे रहे हैं। इससे गन्ना किसान अब शरदकालीन गन्ने की बुआई कर मालामाल होंगे। नर्सरी में पौधा महज 15 दिन में तैयार हो जाएगा। धान कटाई के बाद इनकी रोपाई की जा सकेगी।
अभी तक किसान गर्मियों में ही गन्ने की बुआई करते रहे हैं। इसका कारण है कि सर्दियों में गन्ना अंकुरण की प्रक्रिया प्रभावित रहती है। गन्ने को काट गुल बनाकर बुआई करने से प्रति बीघे 6 क्विंटल गन्ने की बीज लग जाता है। अंकुरण भी महज 70 फीसदी तक हो पाता है। इतना ही नहीं बीज शोधन नहीं होने के कारण सामान्य तरीके से बोई फसल में अनेक रोग सक्रिय हो जाते हैं। इससे किसानों को अनावश्यक खर्च करना पड़ता है।
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इस तरह तैयार हो रही नर्सरी
निरोगी गन्ने को तोड़कर उसकी पत्ती साफ करने के बाद गन्ने की एक आंख के दोनों ओर दो-दो इंच दूरी से गन्ने को काटकर आंख को सुरक्षित निकाल लिया जाता है। जिसे एक ट्रे में नारियल के बारुद के मिश्रण में दबा दिया जाता है। इससे पूर्व अनेक दवाओं से गन्ने का शोधन भी किया जाता है।
-15 दिन में उग जाएगा पौधा
इस विधि से गन्ने का पौधा नर्सरी में महज 15 दिन में उग कर बोने लायक हो जाएगा। जिसे धान आदि के खेत में डेढ़ से दो फिट की दूरी पर रोपा जाना है। इस विधि से तैयार की गन्ने की फसल का उत्पादन जबरदस्त रहता है।
-नहीं सताएगी टॉप बोरर जैसी बीमारी-
एक आंख पद्धति से तैयार किए पौधे की प्रतिरोधक क्षमता नर्सरी में इतनी बढ़ाई जाएगी कि उसे टॉप बोरर जैसे रोग भी नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। इससे उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोत्तरी होगी।
बीज पर आने वाले अनावश्यक खर्च से मिलेगा छुटकारा
अमूमन किसान सामान्य तरीके से ईख की बुआई करते हैं, इसमें प्रति बीघे करीब 6 क्विंटल बीज की खपत हो जाती है। जिसकी कीमत करीब 1800 रुपये होती है। वहीं, एक आंख पद्धति पर आधारित विधि से गन्ने की बुआई पर महज एक बीघे में दो क्विंटल गन्ने का बीज पर्याप्त होगा। ऐसे में किसानों को प्रति बीघा करीब 1200 रुपये का लाभ होगा।
जिला गन्ना अधिकारी नमिता कश्यप का कहना है इस विधि से गन्ने का बीजोपचार हो जाता है। फसल में बीमारियों का प्रकोप कम होता है। किसानों को आधुनिक तकनीक को अपनाना चाहिए। इस विधि से नर्सरी तैयार करने पर शत प्रतिशत अंकुरण होता है।
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नगलामल शुगर मिल के क्षेत्रीय प्रबंधक धीरज सिंह ने बताया कि किसानों को इस विधि के प्रति प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। किसानों को यह विधि अपनाकर गन्ने की बुआई करने पर बंपर लाभ होगा। कीटनाशक, उर्वरकों पर अनावश्यक खर्च से भी उन्हें छुटकारा मिल जाएगा।
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