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सूकर पालन से आत्मनिर्भर होंगे बेरोजगार

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सूकर पालन से आत्मनिर्भर होंगे बेरोजगार
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हापुड़। जिले की बेरोजगार युवा पीढ़ी सूकर पालन कर आत्मनिर्भर बनेगी। यहां उत्पादित सूकर के मीट की बिक्री विदेशों तक होगी। इस सबंध में शासन ने पशुपालन विभाग को ब्लॉकवार कार्यशालाएं लगाकर इच्छुकों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही फार्मों की संख्या 40 से बढ़ाकर 500 तक करने का लक्ष्य दिया है।
पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार हमारे पूरे देश में इस समय सूकरों की संख्या सिर्फ 13 लाख है। हापुड़ में भी सिर्फ 4 हजार सूकर ही प्रति वर्ष वयस्क हो पाते हैं। ऐसे में यहां से सूकर का मीट निर्यात तो दूर जिले की मांग को भी पूरा नहीं कर पाता। जिले का बड़ा तबका गांवों में बेरोजगार घूम रहा है। इन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए शासन ने जिले में सूकर पालन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पशुपालन विभाग अब ब्लॉकवार कार्यशालाएं लगाकर लोगों को सूकर पालन के प्रति प्रशिक्षित करेगा। इसके लिए जिलेभर में कार्यशालाओं का शुभारंभ होगा। इसमें इच्छुकों को सूकर पालन से जुड़ी प्रत्येक बारीकियां बताई जाएंगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. प्रमोद कुमार का कहना है सूकर फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिले में बड़ी संख्या में सूकर फार्म स्थापित कराए जाएंगे।
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-जिले में खुलेंगे 500 से अधिक सूकर फार्म
सूकर पालन मुनाफे की दृष्टि से महत्वपूर्ण व्यापार माना जाता है। जिले में फिलहाल 40 फार्म संचालित हैं। अब पशुपालन विभाग लोगों को प्रोत्साहित कर जिले में फार्मों की संख्या 500 तक पहुंचाना है।

-नाबार्ड करेगा सहयोग, विभाग करेगा प्रोत्साहित
सूकर पालन के इच्छुक लोगों को नाबार्ड से सहयोग मिल सकेगा। इस संबंध में पशुपालन विभाग के अफसर लाभार्थियों को दिशा निर्देश देंगे, जिसके तहत वह लोन के लिए भी आवेदन कर सकेंगे।

-पशुपालन विभाग कराएगा बीमा
सूकर पालन के दौरान पशुओं की मौत से फार्म संचालकों को नुकसान न हो, इस उद्देश्य से पशुपालन विभाग बहुत कम दर पर सूकरों का बीमा कराएगा। ऐसे में सूकरों की मौत से पालकों को परेशानी भी नहीं होगी।

-जिले को प्रति वर्ष 40 हजार सूकर के मांस की आवश्यकता
विभागीय अफसरों के अनुसार जिले में प्रति वर्ष 40 हजार सूकर के मांस की आवश्यकता है। जबकि यहां सिर्फ 5 हजार ही सूकर प्रति वर्ष वयस्क हो पाते हैं। ऐसे में जिले में सूकर फार्मिंग फायदे का सौदा साबित होगा।
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-इन नस्लों का करें चयन
पशुपालन विभाग के अफसरों के अनुसार सूकर फार्मिंग करने के इच्छुक लोग विदेशी नस्लों को अपनाएं, इसमें ड्यूरॉक, लार्ज व्हाइट योर्क, हेंपश्री मुख्य हैं। देसी नस्लों में घुंघरु, नियांग मेघा, अनकामली मुख्य हैं। इन नस्लों के सूकर 8-10 महीने में ही एक क्विंटल के हो जाते हैं।
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