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एक दर्जन पशुओं की मौत होने से अश्व मेले में हड़कंप मचा

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चार दिन में एक दर्जन पशुओं की मौत से अश्व मेले में हड़कंप
- ग्लैंडर्स फारसी बीमारी की आशंका से पशु मालिक दहशत में
- सीवीओ ने कहा-चढ़ाने उतारने में चोट के कारण हुई पशुओं की मौत
भूतेश्वर प्रसाद शर्मा
गढ़मुक्तेश्वर। बीते चार दिन में एक दर्जन पशुओं की मौत होने से अश्व मेले में हड़कंप मच गया है। पशु पालक ग्लैंडर्स फारसी बीमारी की आशंका से दहशत में हैं। हालांकि पशु चिकित्सा विभाग ने इससे साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि वाहनों में चढ़ाने उतारने के दौरान जख्मी होने के कारण पशुओं की मौत हुई है।
गढ़ में गंगा किनारे भर रहे देश के सबसे बड़े अश्वीय प्रजाति के मेले में इन दिनों 20 हजार से भी अधिक घोड़े, खच्चर और गधे खरीद-फरोख्त के लिए आए हुए हैं। अगले पांच दिनों के भीतर पशुओं की संख्या में और भी बढ़ोतरी होनी है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ ही हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, बिहार, दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश समेत कई प्रांतों के लोग अपने पशुओं को बिक्री के लिए लाए हैं। इनमें चार दिन के भीतर एक दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। इन पशुओं के शव को डीएम द्वारा गठित टीम ने मिट्टी में दबवा दिया है। मेले में एक दर्जन पशुओं की मौत होने से चिकित्सा विभाग समेत मेले में चिकित्सा कैंप लगा रहे एनजीओ संगठनों में भी हड़कंप मच गया है।
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यह हैं बीमारी के लक्षण
ग्लैंडर्स फारसी बीमारी बेहद घातक होती है। इसमें इम्युनिटी सिस्टम कमजोर पड़ने से पीड़ित अश्वीय प्रजाति के मवेशी के पूरे शरीर पर फफोले हो जाते हैं और तेज बुखार होने पर वह शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर होकर खाना पीना तक छोड़ देते हैं। इस बीमारी के जीवाणु हवा में उड़कर दूसरे मवेशियों समेत इंसानों को भी अपनी गिरफ्त में ले सकते हैं।
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ब्रुक हॉस्पिटल की सीएफ प्रेमा पांडेय का कहना है कि मेले में अब तक जिन पशुओं की मौत हुई है, वे वाहनों में चढ़ने उतरने के दौरान जख्मी हुए थे। वहीं डिप्टी सीवीओ डॉ. वीरसिंह का कहना है कि वाहनों में क्षमता से अधिक पशु लादने के साथ ही उतारने चढ़ाने के दौरान भी उन्हें चोट लग जाती है, जिससे कई पशुओं की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि मेले में आए किसी भी पशु में अब तक ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं। फिर भी शारीरिक तौर पर कमजोर और बीमार पशुओं पर विशेष नजर रखने के साथ ही जरूरत पड़ने पर उनके रक्त के नमूने जांच के लिए हिसार प्रयोगशाला भिजवाए जाएंगे।
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