सावधान! त्योहारों का जायका न बिगाड़ दें मिलावटी मिठाइयां
गढ़मुक्तेश्वर। त्योहारों का सीजन आते ही मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। बाजार में मिठाई बनाने में धड़ल्ले से नकली मावा और सिंथेटिक रंगों का प्रयोग हो रहा है। वहीं खाद्य विभाग मौन है।
सावन के महीने में शिवरात्रि, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी जैसे त्यौहार आते हैं। वहीं शादीशुदा बेटियों के घरों में सिंधार पहुंचाने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। इसे लेकर गुझिया, घेवर समेत अनेक तरह की मिठाइयों से बाजार सजने लगे हैं। बाजार में मिठाई बनाने में नकली मावे के साथ ही सिंथेटिक रंगो का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। दुकानों में रखी रंग बिरंगी मिठाइयां देखने में तो बेहद अच्छी लगती हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकती हैं। नकली मावा तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ही, वहीं सिंथेटिक रंग भी शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। लेकिन दुकानों पर बिक रही इन मिलावटी मिठाइयों को लेकर खाद्य विभाग समेत स्थानीय प्रशासन गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। अब तक मिलावटखोरी रोकने के लिए कोई अभियान नहीं शुरू किया है। इसके चलते ऐसे दुकानदारों को हौसले बुलंद हैं।
जानलेवा हो सकती है मिलावटखोरी
सीएसची अधीक्षक डॉ. एके तेवतिया ने बताया कि सिंथेटिक रंगों और नकली मावे से बनी मिठाई खाने से आहार नली में अल्सर के साथ ही गुर्दों पर भी बुरा असर पड़ता है।
ऐसे करें पहचान
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप ने कहा कि मिलावटखोरी से बचने के लिए आम लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। नकली मावा की पहचान के लिए उसे फिल्टर पेपर पर रखकर आयोडीन की दो तीन बूंद डालें, अगर वह काला पड़ता है तो मिलावटी है। अगर अंगुलियों से मसलने पर दाने नजर आते हैं तो भी मावा मिलावटी है। सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेली के बीच रगड़ें। अगर साबुन जैसे झाग बने तो फिर दूध सिंथेटिक है। चांदी का वर्क जलाने पर उतने वजन की गेंद सी बन जाती है, लेकिन अगर वर्क नकली है तो फिर सिलेटी रंग का जला कागज बन जाएगा।
खाद्य विभाग को मिठाइयों की दुकानों पर छापामारी करने का निर्देश दिया गया है। मिलावटखोरी करने वाले दुकानदारों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही दुकानों पर छापे मारकर मिठाइयों के नमूने लिए जाएंगे।
- ज्योति राय, एसडीएम