फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेसहाराओं को आसरा देने वाली योजना भी कोई राहत नहीं दे पा रही

विज्ञापन
विज्ञापन
आसरा योजना भी नहीं दे पाई बेसहाराओं को सहारा
विज्ञापन


आसरा देने वाली योजना भी बेसहाराओं को सहारा नहीं दे पा रही है। नियत अवधि के बाद भी आवंटन तो दूर, करोड़ों की लागत से बनाए जा रहे मकानों का निर्माण तक पूरा नहीं हो पाया है,

जिससे आवास विहीन परिवारों का आशियाना मिलने का सपना परवान नहीं चढ़ पा रहा है। सपा सरकार ने शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आवास विहीन परिवारों को आशियाना मुहैया कराने के लिए कांशीराम आवासीय योजना की तर्ज पर आसरा योजना लॉच की गई थी।
विज्ञापन


इसके तहत गढ़ में नक्का कुआं से खादर मेले को जाने वाले रास्ते पर स्थित सरकारी भूमि को चिन्हित किया गया था। जिसे पालिका प्रशासन ने शासन के सुपुर्द कर दिया था।

आसरा योजना के तहत गढ़ में मकान बनाने का काम 20 सितंबर 2015 को प्रारंभ हुआ था, जिसमें चार मंजिला इमारत के रूप में कुल 108 मकानों का निर्माण 19 मार्च 2017 तक पुरा करने की सीमा तय की गई थी।

अब तक आधे मकान ही पूरी तरह तैयार हो पाए हैं, जबकि शेष पर प्लास्टर समेत रंगाई-पुताई और खिड़की-दरवाजे लगने का इंतजार कर रहे हैं।

आसरा योजना से जुड़े 108 मकानों पर कुल 543.84 करोड़ की लागत आनी है। बेसहारा परिवार आसरा मिलने की आस लेकर एक साल से तहसील समेत पालिका दफ्तर के चक्कर काटते घूम रहे हैं।

चेयर पर्सन संगीता पुरुषोत्तम का कहना है कि आसरा योजना के तहत बनाए जा रहे मकानों का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग में कराया जाएगा।

आवेदन करने वाले परिवारों की पालिका के अलावा तहसील और रजिस्ट्रार कार्यालय से भी जांच होनी है।
एसडीएम मीनू राणा का कहना है कि उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन अब सभी मकानों को बहुत जल्द पूरा कराने के साथ ही उनके आवंटन की प्रक्रिया चालू कराई जाएगी।
विज्ञापन



डूडा विभाग के जिला परियोजना अधिकारी संदीप कुमार का कहना है कि आसरा योजना के मकानों का सीएनडीएस कंपनी से निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन मकान निर्माण निर्धारित अवधि में न होने की वजह शासन स्तर से पैसा आने में देरी होनी रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें