मोदी जी! बैंकों की तर्ज पर कैसे चलेंगे डाकघर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही डाकघरों को बैंकों की तर्ज पर चलाने का सपना देख रहे हों, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही से यह सपना साकार होता नजर नहीं आ रहा है।
मुख्य डाकघर में बीते पांच महीने से चेक बुक खत्म पड़ी हैं। ग्राहक अधिकतर पैसों का लेनदेन चेक के माध्यम से ही करते हैं। लेकिन अफसरों की अनदेखी से उन्हें मायूस होना पड़ रहा है।
बुलंदशहर रोड स्थित प्रधान डाकघर में इन दिनों अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। ग्राहकों की समस्याओं को न तो सही तरीके से सुना जाता है और न ही उसके निस्तारण का प्रयास किया जाता है।
आलम यह है कि बीते पांच महीने से डाकघर में चेक बुक ही नहीं हैं। ऐसे में ग्राहक रोजाना डाकघर के चक्कर लगा रहे हैं। वहां मौजूद आलाधिकारी भी ग्राहकों को टरकाने में ही भलाई समझ रहे हैं। चेक बुक उपलब्ध कराने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। मजबूरी में ग्राहकों को बैंकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
पोस्ट मास्टर एसएन गुप्ता का कहना है कि चेक बुक का स्टॉक पीछे से नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में कई बार रिमाइंडर दिए जा चुके हैं। स्टॉक आते ही ग्राहकों को राहत मिल जाएगी।