हजारों छात्र स्नातक कक्षाओं में प्रवेश से रह सकते हैं वंचित
हापुड़। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद और सीबीएसई की बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बड़ी संख्या में जिले के 11,779 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें पांच हजार से अधिक छात्रों ने फर्स्ट डिवीजन प्राप्त की है। इस छात्रों को इस सत्र में स्नातक कक्षाओं में प्रवेश नहीं मिलने पर मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। जिले में मोनाड समेत सिर्फ 15 डिग्री कालेज हैं।
इनमें से एसएसवी पीजी कालेज, एकेपी पीजी कालेज और चौधरी ताराचंद डिग्री कालेज, श्रीमती विमला देवी डिग्री कालेज, रामतीर्थ, राजीव गांधी डिग्री कालेज, आईएमआईटी एवं जेएमएस हापुड़ में, राणा डिग्री कालेज और केशव मारवाड़ डिग्री कालेज और लॉ कालेज पिलखुवा में हैं। जबकि किसान पीजी कालेज सिंभावली में, श्रीमती विमला देवी डिग्री कालेज, राजकुमार गल्र्स डिग्री कालेज, महेन्द्र डिग्री कालेज गढ़मुक्तेश्वर, छत्रपति शिवाजी डिग्री कालेज बहादुरगढ़ में है। इन डिग्री कालेज में कुछ ही कालेज ऐेसे हैं जहां विज्ञान की कक्षाएं चलती हैं। अधिकांश डिग्री कालेज में कला और कामर्स की कक्षाएं चलती हैं। इन सभी कालेजों में अधिकतम 7500 हजार छात्र छात्राओं को तो आसानी से प्रवेश मिल सकेगा, जबकि शेष के लिये काफी मुसीबत रहेगी।
हापुड़ जिले में 102 इंटर कालेज यूपी बोर्ड और 16 स्कूल सीबीएसई से संबंद्ध हैं। दोनों बोर्ड का परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में 9337 और सीबीएसई में 2442 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। कुल मिलाकर हापुड़ जिले से इस सीजन में उत्तीर्ण होने वाले छात्र छात्राओं की संख्या 11,779 पहुंच गई है। इनमें से अधिकतम 2000 बच्चे तो ऐसे होंगे जिन्हें मेरिट या प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर अच्छे संस्थानों इंजीनियरिंग, मेडिकल कालेज में प्रवेश मिल जाएगा, लेकिन करीब नौ हजार छात्रों को विज्ञान, कामर्स, कला की स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए जूझना पड़ेगा।
प्रोफेशनल कोर्स और प्राइवेट परीक्षाओं से राहत
- इस मुद्दे पर एसएसवी पीजी कालेज की प्राचार्या डा.शशि वशिष्ठ का कहना है कि यह बात सही है कि स्नातक कक्षाओं में प्रवेश की समस्या रहती है, लेकिन अब बड़ी संख्या में प्रोफे शनल संस्थान खुल गये हैं। इनमें बच्चे बीबीए, बीसीए की कक्षाओं में प्रवेश ले लेते हैं। इतना ही नहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे बारहवीं करते ही नौकरी करने लगते हैं तथा प्राइवेट फार्म भरकर अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश लड़कियां तो अक्सर स्नातक कक्षाओं के लिए प्राइवेट फार्म भरकर ही काम चलाती हैं। फिर भी अगर कुछ और डिग्री कालेज खुलें तो इस समस्या से निजात मिल सकती हैं।