रेलवे विभाग में एक बड़ी गड़बड़ी को खुलासा हुआ है। स्थानीय रेलवे स्टेशन की एक साइड से रेलवे की 10 पटरियों को अवैध रूप से उठवाकर एक फैक्ट्री में बिछाने और पैड्रोल क्लिप को बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया है।
यूनियन की ओर से शिकायत होने पर आठ पटरियां तो रेलवे वापस मिल गईं, लेकिन दो पटरियां अभी भी उक्त कंपनी में बिछी हैं। जिसका रेलवे को कोई राजस्व नहीं मिला। मामले में एईएन ने जांच आरपीएफ को सौंपी है।
सूत्रों के अनुसार उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन ने एईएन को शिकायती पत्र दिया था। जिसमें उल्लेख किया कि रेलवे के हापुड़ में तैनात एक सीनियर पीडब्लूआई ने रेलवे स्टेशन की एक साइड से 10 पटरियां अवैध रूप से उठवाकर गाजियाबाद की एक कंपनी में बिछाने के लिए दे दीं।
जबकि किसी भी फैक्ट्री के अंदर रेलवे लाइन बिछाने का खर्च संबंधित कंपनी को करना पड़ता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। यूनियन ने एईएन हापुड़ से 28 दिसंबर को शिकायत की थी। उन्होंने मामले की जांच आरपीएफ हापुड़ को सौंप दी।
बताया गया है कि शिकायत होते ही पीडब्लूआई ने 10 में आठ रेल पटरियां कंपनी से उठवाकर बाहर करवा दीं, जबकि दो रेल पटरी अभी भी वहीं बिछी हैं। साथ ही बेचे गए पैड्रोल क्लिप का कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा है।
आरपीएफ निरीक्षक एचएम असलम ने बताया कि एईएन ने उन्हें जांच के लिए पत्र भेजा है। मामला विभागीय होने के कारण आरपीएफ मुरादाबाद के कमांडेंट को रिपोर्ट भेजी जा रही है। पटरी चोरी नहीं हुई हैं, बल्कि अवैध रूप से एक कंपनी में बिछाई गई हैं।
जबकि नियमानुसार इन पटरियों को बिछाने का राजस्व वसूलकर रेलवे में जमा होना चाहिए था। मामले में ऐसा न करके रेलवे को राजस्व हानि पहुंचाने का मामला बनता है।