राठ। मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में 10 दिन बाद मृतक युवक का शव गांव आ पाया। डीएनए परीक्षण से हुई शिनाख्त के बाद परिजनों को शव सौंपा गया। गांव में अंतिम संस्कार हुआ तो हर आंख नम थी।
मझगवां थाने के बरुआ गांव निवासी शैलेंद्र राजपूत दिल्ली में पत्नी किरन, बेटी खुशी (11) व बेटे मनीष (6) के साथ रहते थे। 11 दिसंबर को गोहांड का दंगल देखने अकेले आए। 15 दिसंबर की शाम स्लीपर बस से दिल्ली के लिए रवाना हुए। 16 दिसंबर की सुबह मथुरा के पास बल्देव स्थित माइलस्टोन 127 पर भीषण हादसा हुआ। बस में आग लगने से शैलेंद्र सहित कई लोग जिंदा जल गए थे। शव इतनी बुरी हालत में था कि उनकी शिनाख्त नहीं हो पाई। शिनाख्त के लिए डीएनए परीक्षण कराया गया।
परीक्षण के बाद शैलेंद्र के शव की शिनाख्त हो पाई। वहां के प्रशासन ने परिजनों को शव सौंपा। बुधवार को गांव में अंतिम संस्कार हुआ।