संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में करीब एक लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में गेहूं की खेती की जाती है। चौड़ी पत्ती, संकरी पत्ती, बथुआ आदि खरपतवारों की वजह से गेहूं की उपज में 15 से 20 फीसदी तक कमी आ सकती है। किसानों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए कृषि विभाग 50 फीसदी अनुदान पर किसानों को खरपतवार नाशक उपलब्ध कराएगा। इसका आवंटन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा।
जनपद में 1.29 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई है जबकि शासन से जिले को मात्र 240 हेक्टेयर फसलों के लिए खरपतवार नाशक सल्फोसल्फ्यूरान व मेटसल्फ्यूरान मिथाइल उपलब्ध कराया है। जो ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है जबकि चार साल तक कोई रसायन कृषि विभाग को नहीं मिला है। बोई गई फसल की तुलना में खरपतवार नाशक कम होने से ज्यादातर किसान प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों में यह खरपतवार नाशक लेने को मजबूर हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि 75 फीसदी दवाओं की खपत प्राईवेट डीलर करते हैं जबकि 25 फीसदी इफ्को व कृषि रक्षा इकाइयाें की जाती है।
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खरपतवार के चलते फसलों को नहीं मिलते पर्याप्त पोषक तत्व
गेहूं की फसल के लिए जो खाद व पानी दिया जाता है। उनका उपयोग फसल के पौधों के साथ-साथ खरपतवार भी करते हैं। इससे फसलों में पर्याप्त पोषक तत्व और पानी नहीं पहुंच पाता। इससे फसल की पैदावार प्रभावित होती है। गेहूं की फसल में दो खरपतवार चौड़ी व संकरी पत्ती अधिक होते हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. इन्द्रेश कुमार ने बताया कि राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर दोनों खरपतवार नाशक उपलब्ध हैं। सल्फोसल्फ्यूरान का विक्रय मूल्य 221 रुपये व अनुदान पर 88 रुपये प्रति यूनिट व मेटसल्फ्यूरान मिथाइल का विक्रय मूल्य 38 रुपये तथा अनुदान पर 15 रुपये प्रति यूनिट है। खरपतवार नाशक रसायनों के एक यूनिट के सक्रिय तत्वों को सॉल्वेंट में अच्छी तरह घोलकर 150 से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ क्षेत्र मे छिड़काव करें। कहा कि दोनों दवाएं 300-300 यूनिट उपलब्ध हैं जो करीब 240 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए है।