क्षेत्र के छह गांवों में सैकड़ों लोग वायरल बुखार की चपेट में हैं। अस्पतालों में मरीजों की लाइनें लगी हैं। उधर रिगवारी गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को मरीजों की जांच कर उन्हें दवाएं बांटीं।
क्षेत्र के चिकासी, गुटकवारा, रिगवारा, जलालपुर, खेड़ाशिलाजीत व अमूंद गांवों में वायरल बुखार कहर बरपा रहा है। हाल ये है कि हर घर में दो से चार मरीज हैं। हालत बिगड़ने पर लोग झांसी, उरई और कानपुर मेडिकल कालेज इलाज को जा रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अब तक गुटकवारा, चिकासी और रिगवारा में कैंप लगाकर करीब 400 मरीजों के इलाज का दावा किया है।
पुरैनी गांव में भी वायरल बुखार का प्रकोप है। सीएचसी सरीला के एमओआईसी डॉ.अशोक ने बताया कि डॉक्टराें की कमी के बाद भी चिकासी, रिगवारा, बसरिया, धगवां व गुटकवारा गांवाें में टीम भेजकर ग्रामीणों का इलाज कराया गया। क्षेत्र में केवल वायरल बुखार ही फैला है। इसमें घबराने की जरूरत नहीं है।
गांवों में मरीजों की संख्या
गुटकवारा गांव में छाया (26), चंदा (28), संतराम (45), कल्लू (30), सुरेश (25), हाकिम (20) सहित करीब 50 मरीज बुखार की चपेट में हैं। चिकासी गांव में वंदना (14), रेखा (30), प्रीतम (18), पानकुंवर (42), सुरेश बाल्मीकि (35), लल्ला अहिरवार (22), श्यामकरन अनुरागी (28), पुष्पा लोधी (23) सहित 45 मरीज बुखार, गले में सूजन और दर्द की शिकायत से परेशान हैं।
रिगवारा गांव में विमला (50), करन सिंह (57), मानकुंवर (40), रूपरानी (70), सिद्धगोपाल (72), विमला (45), रमादेवी (40), अनीता (35), नंदकिशोर (35), रमेश (13), रानी (21), सियारानी (65), प्रियंका (18), सीता (19) सहित 77 लोग वायरल बुखार की चपेट में है।
बुखार ने जलालपुर गांव को भी चपेट में ले लिया है। यहां भी सुशील (22), प्रदीप (21), मोना खां (25), अरविंद (28), उर्मिला (30), शिवकली (35), चंदी (45), पुष्पेंद्र (6), अफरोज (20) सहित 52 लोग बीमार हैं। खेड़ाशिलाजीत गांव में विभाग की टीम नहीं पहुंची। यहां के सुक्खा (37), सुरजन (32), सीमा (25), कल्लू (18), पिंकी (20), आशा (26), सलमान (22), संतोषरानी (55), रामवती (65), कृपारानी (55) सहित 62 लोग बुखार की चपेट में है।
डॉक्टरों की कमी से मुसीबत
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दंभ भरने वाला विभाग खुद डाक्टराें की कमी से जूझ रहा है। सीएचसी में पांच और क्षेत्र के तीन अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। क्षेत्र के धगवां, भैंसाए, चंडौत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्टों के दम पर चल रहे हैं। पुरैनी गांव में संविदा डॉक्टर का ही सहारा है।
सीएचसी सरीला में बाल रोग, स्त्री रोग, सर्जन, फिजीशियन, एनेस्थिसिया, हड्डी रोग विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं। एमओआईसी और एक डॉक्टर ही सीएचसी को संभाले हैं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी मरीजों के लिए मुसीबत खड़ी कर रही है।
ग्रामीण स्वच्छता समिति की धनराशि डंप!
गांवों की गलियां और नालियां कीचड़ से बजबजा रही हैं। जिससे मच्छराें का भी प्रकोप है। ग्राम प्रधान और एएनएम भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक ने बताया कि संक्रामक रोगों के बचाव और सफाई के लिए ग्राम प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में ग्रामीण स्वच्छता समिति के नाम पर दस हजार रुपये की धनराशि आती है। जिसका प्रयोग गांवों की सफाई और दवा छिड़काव के लिए किया जाता है, लेकिन ज्यादातर गांवाें में ये धनराशि डंप पड़ी है।
तीन दिनों से प्रभावित गांवों में टीमें इलाज कर रहीं हैं। मरीजों की स्लाइडें बनाकर दवाएं बांटी जा रहीं हैं। मौसम बदलने से वायरल फैला है। चिकित्सकों की कमी है, इसके बावजूद लोगों को चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
श्रीराम सोनी, सीएमओ