कार्तिक माह की एकादशी पर देवोत्थान पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। लोगों ने अपने घरों में भगवान विष्णु और नई फसलों की पूजा कर धन धान्य और संपन्नता की कामना की। आस्थावानों ने शाम को अपने घरों में गन्ना, चने की भाजी, बेर, कचरिया, ज्वार की भी पूजा की।
एकादशी के दीप जलाकर लोगों ने अपने घरों को रोशन किया। कस्बा और ग्रामीण क्षेत्र में देवोत्थान एकादशी के त्योहार पर शाम ढलते ही पूजन शुरू हो गया। ऐसी मान्यता है कि आज से देवी देवता विचरण करने लगते हैं। देव उठने के बाद विवाह आदि शुभ कार्यों का होना भी शुरू हो जाता है। अच्छी फसल की कामना के उद्देश्य का भी इस पूजन में महत्व माना गया है।
गुरुवार को इस त्योहार के मद्देनजर गन्ना बेंचने वालों की खूब चांदी रही। महंगाई की मार बाजार में देखने को मिली। जहां लोग एक एक दर्जन गन्ना लेकर पूजा अर्चना करते थे आज दो चार गन्ना खरीद पूजा की रस्म अदा की। बाजार में एक गन्ने की कीमत 10 रुपये से लेकर 20 रुपये तक रही। पिछले साल एक गन्ने की कीमत 5 रुपया थी। बाजार में गन्ना बेंच रहे रामेश्वर दयाल, दीनदयाल ने बताया खाद बीज और पानी के दाम बढ़ने से गन्ने के दाम बढ़ाना भी उनकी मजबूरी है।