पंप कैनाल में रखीं 6 मोटरों में मात्र दो से पानी चलाया जा रहा है। यही
कारण है कि नहरों में जगह-जगह कटान होने से पानी सिर्फ छानी गांव तक ही आ
सका है। इसी के चलते क्षेत्र के तालाब सूखे पड़े है। मवेशियों को
हैंडपंपों या कुओं से पानी पिलाना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी के बीच पेयजल
के साथ मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम करने में प्रशासन जुटा है। लेकिन
अभी भी तमाम गांवों के तालाबों को नहीं भरा जा सका है। नहरों व लिफ्ट
कैनालों को संचालित करने के आदेश हवा हवाई साबित हो रहे हैं।
मौदहा बांध की
नहरों में टेल तक पानी भेजा जा चुका है। इन नहरों का पानी तालाबों के साथ
खेतों में भी फैल रहा है। वहीं बीहड़ी क्षेत्र में केन नदी से निकाली गई
छानी पंप कैनाल का हाल बुरा है।
कैनाल में छह मोटरें हैं लेकिन मौजूदा समय
में सिर्फ दो से पानी चलाया जा रहा है। सिसोलर गांव निवासी पूर्व बसपा
अध्यक्ष विजय शंकर प्रजापति ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर पंप कैनाल
पहुंचे। मौके पर सिर्फ दो मोटरें ही बिजली आने पर चलाई जा रही हैं। कैनाल
का पानी दो खंडों से उठाया जा रहा है।
ऊपर वाले खंड में चार पंपों में से
एक पंप चलाया जा रहा है। वह भी सिर्फ नाममात्र का पानी फेंक रहा है। वहीं
इस मुख्य नहर में भटुरी के निकट पूरी नहर टूटी पड़ी है। खांदी होने से एक
बूंद पानी भटुरी व सिसोलर की ओर नहीं आ रहा है।
इससे भैसमरी, भटुरी, सिसोलर
व छानी का एक बड़ा इलाके में पानी नहीं मिल रहा है। बताया कि इन गांवों
के तालाब सूखे पड़े हैं। क्षेत्र में नलकूपों का अभाव है सिर्फ इसी नहर के
सहारे लोग हैं।
छानी पंप कैनाल की नहरें छोटा लेवा गांव तक फैली हैं। लेकिन
सिंचाई के समय भी पानी नहीं मिल पा रहा है। इस मामले लघु डाल नहर विभाग के
अधिशाषी अभियंता सूर्यकुमार को दो बार मोबाइल मिलाकर जानकारी करने का
प्रयास किया गया। लेकि न उन्होंने रॉग नंबर कहकर मोबाइल काट दिया।