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Hamirpur News: कुंडौरा मौजे की नक्शा दुरुस्ती का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा

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हमीरपुर। जनपद में नक्शा दुरुस्ती के नाम पर कर्मचारियों की ओर से नियम विरुद्ध किए जा रहे कार्यों की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है। न्यायिक अपर जिलाधिकारी कार्यालय पर गंभीर आरोप लगे हैं। खेत स्वामी ने शपथ पत्र पर पैसा लेकर आदेश पारित करने का खुला आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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भरुआ सुमेरपुर निवासी मनीष कुमार गुप्ता ने सूबे के मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। शपथ पत्र के साथ अपर जिलाधिकारी न्यायिक के कार्यालय में कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रावलियों से छेड़छाड़ कर मनमाफिक आदेश पारित कराने का आरोप है। यह भी आरोप है कि कर्मचारियों और पेशकार की मिलीभगत से कथित रूप से पैसे लेकर फैसला प्रभावित किया जाता है। वाद से संबंधित पत्रावलियों में बदलाव कर गलत आख्या रिपोर्ट मंगाई जाती है जिससे आदेश प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। पिछले चार महीनों में पारित आदेशों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएं।
शिकायत में ड्राफ्टमैन पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि एक ही मामले में अलग-अलग तिथियों पर तीन आख्या रिपोर्ट भेजी गईं। उक्त मामले में पेशकार आशीष कौशल, कनिष्ठ लिपिक अल्ताफ व ड्राफ्टमैन की ओर से कई बार कथित तौर पर पैसा मांगा गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में की गई शिकायत का अभी तक समाधान नहीं निकला है।
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आयुक्त से की गई ड्राफ्टमैन की शिकायत



कुंठौरा मौजे में खेत खरीदने वाले सुमेरपुर निवासी मनीष कुमार गुप्ता ने बीते माह 21 अप्रैल को आयुक्त चित्रकूट धाम मंडल बांदा को शपथ पत्र के साथ शिकायती पत्र दिया। इसमें ड्राफ्टमैन अरुण कुमार की शिकायत की गई। नियम विरुद्ध तरीके से प्राथमिकी दर्ज को प्रभावित करने के लिए तीन भिन्न-भिन्न आख्या रिपोर्ट प्रस्तुत की। मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।



यह है पूरा मामला



नक्शा दुरुस्ती के लिए वर्ष 2022 में अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां वाद दायर किया गया था। एक साल से अधिक समय तक उक्त मामले में सुनवाई हुई। 28 दिसंबर 2023 को फाइल निरस्त कर दी गई। इस दौरान कर्मचारियों ने सौदेबाजी करने का प्रयास किया। एक जनवरी 2024 को आयुक्त के यहां वाद दायर किया गया। आयुक्त ने मामले में आदेश जारी किया था। वापस फाइल एडीएम न्यायिक के यहां भेजी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यहां पर फाइल को दबा लिया गया। विपक्षीगणों ने आयुक्त के आदेश को चैलेंज करते हुए राजस्व परिषद में वाद दायर कर दिया। सात जुलाई 2025 को मनीष के पक्ष में आदेश जारी हुआ। 30 दिसंबर 2025 को न्यायिक एडीएम के यहां से फाइल निरस्त हुई। बाद में आयुक्त बांदा के यहां फिर मामला पहुंचा। आयुक्त ने सुनवाई के बाद 10 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद फाइल एडीएम न्यायिक के यहां पहुंची। इसके बाद मनीष गुप्ता ने फाइल को स्थानांतरित कराया। आयुक्त ने 9 अप्रैल 2026 को एक और आदेश जारी किया।



रिश्वत लेते गिरफ्तार हो चुका पेशकार

न्यायालय उप संचालक चकबंदी के पेशकार अल्ताफ को एंटीकरप्शन टीम ने 30 अप्रैल को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। हरियाणा के जिला फतेहाबाद निवासी धर्मवीर सिंह ने एंटीकरप्शन टीम से नक्शा दुरुस्ती की फाइल में 25 हजार रुपये मांगने की शिकायत की थी। जिस फाइल का सौदा किया था वह अपर जिलाधिकारी न्यायिक कार्यालय से संबंधित थी। पेशकार वहां पर भी कनिष्ठ लिपिक के पद पर अटैच था। वहां पर दूसरे पटल की फाइलों में उसका हस्तक्षेप रहता था। वर्ष 2025 में चकबंदी विभाग के पेशकार प्रमोद कुमार पांच हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार हो चुके हैं।
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