हमीरपुर। गांवों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के उद्देश्य से मेरा गांव मेरी धरोहर योजना शुरू की गई है। अब तक जिले में 346 से अधिक मंदिरों और गांव की धरोहरों को इसके पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। पोर्टल पर दर्ज होने के बाद इन स्थानों को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लोग अपनी लोक संस्कृति, गांव, माटी, मेला और स्थलों को जान सकेंगे। साथ ही गांव के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
इसके लिए राजस्व, पर्यटन और पंचायतीराज विभाग की संयुक्त टीमों ने बीते दिनों सर्वेक्षण किया था। इसके बाद सभी ग्राम सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने गांव की विस्तृत प्रोफाइल कर पोर्टल पर डेटा अपलोड करें। सचिवों की ओर से 346 धरोहरों को पोर्टल पर दर्ज कराया गया है। पोर्टल पर दर्ज होने के बाद अब विदेशों में रह रहे लोग भी अपनी लोक संस्कृति, गांव, माटी, मेला और स्थलों के बारे में जान सकेंगे। इसके लिए उन्हें किसी से पूछने की जरूरत नहीं होगी। डीपीआरओ के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांव में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है।
यह है योजना
योजना के तहत जिले के प्रत्येक गांव के प्रसिद्ध मंदिर, मेले, तालाब, प्राचीन स्थल और अन्य धरोहरों को पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। केंद्र सरकार की इस पहल का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण युवाओं में रोजगार उपलब्ध कराना है। जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में प्राचीन खंडेह मंदिर, कामाख्या धाम देवगांव, बैठका धाम, गायत्री तपोभूमि, पंचमुखी हनुमान मंदिर भूंधरा पत्योरा, शहर स्थिति प्राचीन संगमहेश्वर मंदिर, मानेश्वर धाम सौंखर, पाथामाई, आदि प्राचीन मंदिर हैं।
जिले के सात ब्लॉकों के 330 ग्राम पंचायतों में 606 राजस्व गांव हैं। इन गांवों की कुल 346 धरोहरों को पोर्टल पर दर्ज किया गया है। ब्लॉक लॉगिन आईडी पर 131 स्थलों का सत्यापन किया जा चुका है।
सुबोध जोशी, डीपीआरओ।