राठ(हमीरपुर)। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को डीके फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में चुनौती दी है।
सरीला कस्बा निवासी फाउंडेशन के यूपी नोडल ऑफिसर महेंद्र राजपूत ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज प्राथमिकी मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है। जिसके खिलाफ उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया कि स्वामी जी के खिलाफ प्राथमिकी राजनीति से प्रेरित व उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से कराई गई है। आरोप लगाया कि यूपी सरकार अपनी शक्तियों का गलत प्रयोग करते हुए आध्यात्मिक गुरु की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रही है। शिकायतकर्ता का इतिहास दागदार है जिसकी शिकायत पर स्वामी के खिलाफ कार्रवाई हुई है। उन्होंने बताया कि याचिका में प्रदेश सरकार के साथ डीजीपी को पक्षकार बनाया गया है। महेंद्र राजपूत ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश सरकार व डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का अनुरोध स्वीकार कर लिया है।