जिला मुख्यालय को रेलवे लाइन से जोड़ने के लिए यूपीए शासनकाल में तैयार प्रोजेक्ट को मोदी सरकार ने आगे बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। वर्ष 2011-12 में तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने नए सिरे से सर्वे रिपोर्ट तलब की है।
रेलवे के यातायात विभाग ने सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के लिए तेजी से काम शुरू कर दिया है और अक्तूबर तक रेलवे बोर्ड को सौंपने की तैयारी में है। रिपोर्ट मिलने के बाद अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो अतिशीघ्र इस पर काम भी शुरू हो जाएगा और विगत कई वर्षों से जिला मुख्यालय के बाशिंदों की मांग पूरी होने का सपना सच हो जाएगा। बांदा से कानपुर रेलवे ट्रैक ब्रिटिश हुकूमत के समय बनाया गया था।
इसे जनपद के इचौली, मौदहा व सुमेरपुर से निकालते हुए सीधा कानपुर जनपद को जोड़ दिया गया और जिला मुख्यालय को इस रेलवे लाइन से दूर रखा गया। सिर्फ नाम के लिए कानपुर जनपद के बरीपाल गांव के निकट हमीरपुर रोड नाम का स्टेशन बना दिया। इससे रेलवे द्वारा प्रस्तावित योजनाओं का लाभ हमीरपुर जिले के नाम पर कानपुर के बरीपाल व उसके क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलता है।
इस पर मुख्यालय के हमीरपुर विकास मंच ने मुख्यालय में रेलवे स्टेशन की मांग शुरू कर दी। बड़ी जद्दोजहद के बाद यूपीए सरकार के दौरान वर्ष 2011-12 में मुख्यालय के निकट कुछेछा में स्टेशन बनाते हुए जलालपुर से लाइन निकालने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया। अब इसी प्रोजेक्ट पर मोदी सरकार काम करने में जुट गई है। रेलवे बोर्ड ने सुमेरपुर रेलवे स्टेशन से जिला मुख्यालय को जोड़ते हुए आटा जालौन के पास रेलवे लाइन जोड़ने के लिए सर्वे रिपोर्ट मांगी है।
इस पर रेलवे के यातायात विभाग ने लाइन का सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। पिछले सप्ताह उत्तर मध्य रेलवे जोन इलाहाबाद के यातायात निरीक्षक बीपी सेन ने सुमेरपुर कस्बे से जलालपुर तक बिछाई जाने वाली 53 किमी लंबी लाइन का सर्वे रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि 520.27 करोड़ रुपये की लागत से इस रेलवे लाइन को बनाया जाना है। चूंकि यह योजना का प्रस्तावित बजट 2011-12 का है। इसमें अब इजाफा हो सकता है। उन्होंने बताया कि सितंबर के आखिरी सप्ताह में रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट सौंपी जाएगी और अक्तूबर में रेलवे बोर्ड इसे हरी झंडी दे सकता है।