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Hamirpur News: पिता के हत्यारे बेटे को आजीवन कारावास की सजा

Tue, 13 Jan 2026 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
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हमीरपुर। कुरारा थाना क्षेत्र में 22 दिसंबर 2020 को कलयुगी बेटे ने जमीन व घर के बंटवारे को लेकर पिता की धारदार हथियार से हत्या के मामले में पांच साल बाद फैसला आया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम उदय वीर सिंह की अदालत ने रामेन्द्र सोनी उर्फ कृष्णा माधवाचार्य को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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कुरारा थाना क्षेत्र के बस स्टैंड वार्ड संख्या नौ निवासी राजेन्द्र कुमार ने थाना पुलिस को सूचना दी थी। बताया था कि 22 दिसंबर 2020 को उसका छोटा भाई रामेन्द्र उर्फ कृष्णा माधवाचार्य घर आया और पिता मिठाईलाल उर्फ कृपाशंकर से रुपये-पैसे मांगने लगा। जमीन व मकान के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया। उसने जान से मारने की नीयत से पिता पर फरसे से हमला कर दिया। बताया गया कि पिता के गले में गहरा घाव हो गया। शरीर के अन्य हिस्सों भी हमले वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। हमले के वक्त पिता मिठाईलाल उर्फ कृपाशंकर की उम्र करीब 52 वर्ष थी। परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने पहले धारा 307 में प्राथमिकी दर्ज की थी, बाद में तरमीम कर धारा 302 भादंवि में बदल दिया गया। विवेचक ने अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हमीरपुर ने संज्ञान लेते हुए 11 फरवरी 2021 को प्रकरण सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया था। इसके पश्चात यह पत्रावली 15 अप्रैल 2022 को स्थानांतरित होकर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, हमीरपुर उदय वीर सिंह की अदालत में प्राप्त हुई।
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अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप सिद्ध करने के लिए कुल आठ गवाह पेश किए। इनमें वादी राजेन्द्र कुमार, उनकी पत्नी नीलम, पंचायतनामा के गवाह जितेन्द्र कुमार, मृतक के पुत्र अनिल कुमार सोनी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार सिंह, चिक लेखक हेड कांस्टेबल शीतला प्रसाद मिश्रा तथा विवेचना करने वाले अधिकारी उप निरीक्षक शिवदान सिंह एवं सेवानिवृत्त निरीक्षक बांकेबिहारी शामिल रहे। तहरीर सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। मामले की सुनवाई के उपरांत न्यायालय ने गवाह और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा के साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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