मौदहा कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद खाली हैं। नि:शुल्क इलाज के लिए प्रचार हो रहा है। लेकिन अस्पताल में दवाएं तो छोड़ो, सीरिंज तक मुहैया नहीं है। बजट के अभाव में दो जनरेटर शोपीस बने हैं। वार्डों मेेें ज्यादातर पंखे बंद रहने से भीषण गर्मी में उल्टी दस्त के मरीज बेहाल हैं।
कस्बे में उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भारी भरकम भवन है। लेकिन अस्पताल में किसी भी मर्ज का विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। सामान्य रूप से एमबीबीएस चिकित्सक ही मरीजों को देखकर तसल्ली दे रहे हैं। बुधवार को 19 उल्टी दस्त के मरीज भर्ती किए गए। दो पीलिया रोग से, कुछ बुखार व पेट दर्द तथा बदन में झनझनाहट व अन्य मर्ज के रोगी आए।
वार्ड नंबर एक व दो और स्पेशल वार्ड भी पूरी तरह मरीजों से भरे मिले। कम्हरिया गांव निवासी इब्राहीम (45) पेट दर्द व दस्त से पीड़ित था। राजरानी पत्नी जयराम रागौल, फत्तेपुर की रूबी, कुल्लू करगावं, इरशाद निवासी कस्बे के उल्टी दस्त से पीड़ित मिले। बताया कि अस्पताल से सीरिंज तक नहीं मिल रही है, इसके अलावा दवाएं भी बाहर से लानी पड़ रही हैं।
इन्होंने चिकित्सकों के लिखे बाहर की दवाओं का पर्चा दिखाया। वार्ड नंबर एक में चार पंखे व एक कूलर लगा है, लेकिन एक पंखा चलता मिला। वार्ड दो में एक कूलर व कुछ पंखे चलते मिले। अस्पताल में कहने को तो चार जनरेटर हैं और कई इनवर्टर अलग-अलग विभागों के लगे हुए हैं। लेकिन दो बड़े जनरेटर बजट के अभाव में शोपीस बने खड़े रहते हैं।
अस्पताल के अधीक्षक डा.अनिल सचान ने कहा कि अभी कुछ समय पहले आठ हजार सीरिंज लाई गईं थीं। सीरिंज की डिमांड कई दिन पहले की जा चुकी है। उन्होंने बाहर से दवा मंगाने पर कहा कि चिकित्सकों को वही दवा बाहर से मंगानी चाहिए, जो अस्पताल में मुहैया न हो, ताकि मरीज की जान बचाई जा सकें।
कहा कि चार जनरेटरो में एक छोटा जनरेटर वैक्सीन व आवश्यक दवाओं को रखने के लिए चलता है। दो बड़े जनरेटर इनवर्टर न चलने की स्थिति में चलाए जाते हैं। लेकिन उन्हें अप्रैल से इनके तेल के लिए बजट मुहैया नहीं हो सका है। कहा करीब 50 हजार रुपये का तेल उधार ले चुके हैं।