जिला अस्पताल में अपनी बारी का इंतजार करते मरीज।
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स्टाफ की कमी से जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। अस्पतालों में सैकड़ों बुखार पीड़ित पहुंच रहे हैं। इसी को देखते शासन ने सीएमओ और सीएमएस को भी प्रतिदिन चार घंटे ओपीडी में बैठने के निर्देश दिए हैं।
गुरुवार को जारी इस आदेश का अनुपालन शुरू कर दिया गया। सीएमओ ने शुक्रवार को मौदहा सीएचसी पहुंच व्यवस्थाएं देखने के साथ ओपीडी में मरीजों को देखा। इसी तरह हमेशा मरीजों से दूर रहने वाले कई एमओआईसी भी मरीजों का उपचार करते मिले। सदर अस्पताल में डा.मनीराम वर्मा पर सीएमएस का प्रभार है।
उनका कहना है कि वह तो प्रतिदिन मरीजों को देख रहे हैं। इसी तरह महिला चिकित्सालय में प्रभारी सीएमएस डा. राजकुमार सचान कहते हैं कि वह तो पहले से ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। सदर अस्पताल में शुक्रवार को बुखार पीड़ितों की भारी भीड़ रही। अस्पताल में 24 में 10 चिकित्सकों की तैनाती है।
गहरौली गांव स्थित न्यू पीएचसी में मुस्करा के एमओआईसी डा.महेश चंद्रा मरीजों का इलाज करने पहुंचे। इलाज कराने पहुंचे दिल्लीपत अहिरवार ने एमओआईसी पर मरीज न देखने का आरोप लगाते हुए हंगामा काटा। कहा कि 16 अगस्त से यह अस्पताल बंद रहा। अमर उजाला ने इस मामले की खबर 30 अगस्त को प्रकाशित की। खबर के असर पर मुस्करा सीएचसी अधीक्षक शुक्रवार मरीज देखने आए। दिल्लीपत ने बताया कि वह व उसका पुत्र सुनील चिकनगुनिया बुखार से पीड़ित होने पर 30 अगस्त को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्करा दिखाने गया। लेकिन मौजूद डाक्टर ने देखने की बजाए उन्हें हमीरपुर के लिए रेफर कर दिया। इस पर मजबूरन बाहर निजी चिकित्सक से इलाज कराना पड़ा। इसकी शिकायत जब एमओआईसी महेश चंद्रा ने उसे भगा दिया था।
उधर एमओआईसी महेश चंद्रा ने कहा कि उन्होंने इलाज कर रहे चिकित्सक से गंभीर बीमारी होने के चलते रेफर करने को कहा था, उनके स्तर की दवाएं दी गई है। अब अस्पताल में दो फार्मेसिस्टों की ड्यूटी लगा दी गई है, जो तीन तीन दिन मरीजों को देखेंगे।